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सबसे प्यारा, सबसे न्यारा, सहारनपुर ये जिला हमारा।
उत्तर में हिमवान यहां पर,
गंगा-यमुना का कल-कल स्वर । मुगल काल से
ख्याति पायी, अकबर ने मुद्रिका चलायी ।
स्वतंत्रता की बलिवेदी पर, परवानों ने प्राण चढ़ाये।
शाकुंभर सा तीर्थ यहां पर, जीवनदाता हैं भूतेश्वर।
पावन
शबद सुनाते ग्रंथी, जिन मुनियों की अमृत वाणी।
शाह
कमाल की धरती है ये, धरा लालदास बाबा
की।
देवबन्द सा केन्द्र यहां पर, जहां से शिक्षा पाता जग भर।
इस
नगरी की शान बढ़ायें, इसको आलीशान बनायें। भूमिका
इस वेबसाइट का विचार मेरे मन में
क्यों और कैसे आया जब यह टटोलने का प्रयास करता हूं तो हमारे देश की
चिंतन-शैली में जन्म ले रही एक मौन क्रान्ति को एक तात्कालिक कारण पाता
हूं। Small town mentality - छोटे शहर की छोटी सोच
- यह कह कर भारत के हज़ारों - लाखों गांवों - कस्बों और नगरों के
वासियों को गरियाने का प्रयास महानगरों में रहने वाले कुछ ऐसे लोग करते
चले आये हैं जो महानगर में जन्म ले - लेने मात्र से स्वयं को विशिष्ट
मान बैठते हैं।
योग्य, होनहार नौनिहालों का जहां तक
संबंध है, सहारनपुर में भी उनकी कोई कमी नहीं
अतः यह वेबसाइट उन जिज्ञासुओं की जिज्ञासा शान्त करने की एक क्षीण सी कोशिश भर है जो कंप्यूटर के मॉनीटर के आगे बैठे - बैठे सहारनपुर के बारे में कुछ रोचक और उपयोगी जानकारी चाहते हैं। यदि मन बने तो सहारनपुर आना भी चाहेंगे वरना सहारनपुर को यथा संभव अपने मॉनीटर के स्क्रीन पर तो देख ही लेना चाहते हैं। देखिये - सहारनपुर के कुछ चित्र चित्र दीर्घा में । मेरा जन्म सहारनपुर में नहीं, अपितु देहरादून में हुआ पर पिछले तीन दशकों से सहारनपुर को ही अपना घर मान चुका हूं। सहारनपुर में आने के बाद मैं जिन-जिन के भी संपर्क में आया, उन सब का अपने जीवन में (व इस वेबसाइट में भी) कहीं न कहीं योगदान अवश्य पाता हूं और इसी नाते उन सब का ऋणी हूं। इस धरती के बारे में मन में जो कोमल भावनायें हैं, उनको ऊपर दिये गये गीत में व्यक्त कर चुका हूं। जो कुछ गीत में नहीं कह पाया, इस वेबसाइट के माध्यम से कहने को उत्सुक हूं। यदि आप इसे उपयोगी पायें तो अपने इस प्रयास को सफल समझूंगा। अपनी ओर से मेरा भरसक प्रयास रहेगा कि यह जानकारी नित्य नवीकृत होकर आप सब तक पहुंचती रहे। इस वेबसाइट को और अधिक उपयोगी व सुविधाजनक बनाने हेतु आप से जो भी सुझाव मिलेंगे उनके लिये आपका ह्र्दय से ऋणी रहूंगा। - सुशान्त सिंहल |
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