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Art is not for hurting people - Kamal Nath

Posted by Sushant Singhal on November 14, 2011 at 1:15 PM

 

कमलनाथ की एक मनमोहक कृति

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में प्रसिद्ध हो रहे सहारनपुर की शान में एक और तमगा लगा है और इस तमगे का नाम है - कमलनाथ !  वर्ष 1969 में कलकत्ता में जन्मे कमलनाथ एक ऐसे कलाकार हैं जो किसी कला महाविद्यालय से ड्राइंग पेंटिंग की शिक्षा विधिवत रूप से ग्रहण न करने के बावजूद अपनी अद्‍भुत प्रतिभा के बल पर देश - विदेश में लाखों लोगों के चहेते बन चुके हैं। आपकी बनाई हुई ऑयल पेंटिग्स की प्रदर्शनी न केवल भारत में बल्कि कनाडा, आस्ट्रेलिया, दुबई और सिंगापुर आदि अन्य देशों में भी लगाई गई हैं और देश विदेश में अनेक लोगों ने आपके किये गये अद्‍भुत कार्य को अपने ड्राइंग रूप व शयनकक्ष की दीवारों पर गर्व के साथ सजाया है। 


प्रस्तुत है कमलनाथ के साथ एक विशेष बातचीत जो ताज होटल में आज ही आरंभ हुई त्रि-दिवसीय प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर कला-दीर्घा में घूमते- घूमते, उनके द्वारा बनाये गये तैल चित्रों का अवलोकन करते करते हुई !




सहा. डॉट कॉम -  पेंटिंग करने के लिये  कैनवस और ब्रश हाथ में लेने हेतु आपको प्रेरणा कहां से मिलती है?


कमलनाथ - पेंटिंग करना मुझे भाता है,  कैनवस के आगे जब मैं आ खड़ा होता हूं तो मुझे और कुछ भी होश नहीं रहता !  प्रेरणा कौन है, यह भी स्पष्ट रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता ।


सहा.डॉट कॉम - पर फिर भी, पेंटिंग बना लेने  के बाद आप उसे सबसे पहले किसको दिखाना चाहते हैं ?


कमलनाथ - घर में पेंटिंग करता हूं, कहीं एकांत में नहीं अतः पत्नी और बच्चे तो मुझे कैनवस पर कार्य करते हुए देखते ही रहते हैं। किसी अन्य विशेष व्यक्ति को दिखाने का प्रयास करता हूं,  ऐसा तो मुझे नहीं लगता !


सहा.डॉट कॉम - यहां प्रदर्शित आपकी लगभग सभी कृतियों में नारी के ही विभिन्न रूपों का ही चित्रण है,  कुछ चेहरे भारतीय हैं तो कुछ विदेशी हैं।   पेंटिंग बनाते समय क्या कोई परिचित चेहरा कैनवस पर बार - बार उभरने लगता है?


कमलनाथ - कुछ पेंटिंग में तो मेरा अपना बेटा ही चित्रित हुआ है जिसको विभिन्न काल्पनिक रूपों में देखता हूं।  पर इनमें से उसका कोई भी स्वरूप ऐसा नहीं है, जो वास्तविक हो ।   यह यथार्थ और कल्पना का मनमाना मिश्रण है।     कभी कभी कोई दृश्य मन को बहुत भा जाता है तो उसे उस समय अपने कैमरे में संजो लेता हूं।    बाद में उसमें अपनी कल्पना के अनुसार परिवर्तन करके मनमाने रंग भरता रहता हुं ।  


सहा. डॉट कॉम - आपकी दृष्टि में कलाकार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कितनी होनी चाहिये?  क्या किसी कलाकार को अपनी रचनाओं से किसी की भावनाओं को आहत करने की अनुमति दी जा सकती है?  


कमलनाथ -  यदि आप यह एम.एफ. हुसैन साहब की कुछ कृतियों को लेकर उठे विवाद के संदर्भ में पूछ रहे हैं तो मेरा स्पष्ट मानना है कि कोई भी कलाकार कभी किसी की भावनाओं को जानबूझ कर आहत करने का काम नहीं करना चाहेगा।  यदि किसी रचना से किसी धार्मिक समूह की भावना आहत हुई हों तो उसे अपनी रचना वापिस ले लेनी चाहिये और भविष्य में कहीं पर प्रदर्शित नहीं करनी चाहिये। 


सहा. डॉट कॉम - पर एम.एफ. हुसैन ने तो अनेकानेक कृतियां ऐसी बनाईं जो हिन्दू जनमानस को उद्वेलित करती हैं,  उनको देख कर क्रोध आता है।  और किसी भी धर्म के देवी - देवता को तो उन्होंने ऐसे कभी भी चित्रित नहीं किया ।


कमलनाथ -  हुसैन साहब बहुत बड़े कलाकार रहे हैं और मैं उनके सम्मुख कुछ भी नहीं फिर भी इतना तो कह सकता हूं कि यदि मेरी किसी रचना से कभी भी, किसी को भी दुःख पहुंचेगा तो मैं स्पष्ट शब्दों में माफी मांगते हुए ऐसी किसी भी रचना को कहीं पर भी प्रदर्शित या प्रकाशित नहीं कराऊंगा।   मेरे लिये मेरी ये कला व्यवसाय नहीं है,  स्वयं खुश रहने और दुनिया में खुशियां बिखेरने का साधन है।    इससे किसी के हृदय को चोट पहुंचे, यह मुझे स्वीकार्य नहीं है।    मेरे चित्र सकारात्मक हैं, जीवन के उजले पक्ष को सम्मुख रखते हैं और देखने वालों के मन में जीवन के प्रति आस्था जगाते हैं।   मुझे कला का यही रूप पसन्द है।   मैं अपने चित्रों से, अपनी कला से किसी को बेचैन नहीं करना चाहता  जबकि कुछ लोग जीवन के नकारात्मक पहलुओं को उभारने को ही सच्ची कला मानते हैं । 


इस अवसर पर कमलनाथ का उत्साहवर्द्धन करने के लिये मौजूद प्रसिद्ध चित्रकार श्री रामशब्द सिंह से भी बातचीत हुई ।   उनके अनुसार कमलनाथ के चित्र दोनों प्रकार के  कलाप्रेमियों को पसन्द आते हैं ।  जो लोग कला की गहराइयों में उतर कर इन चित्रों की सफलता और महत्ता को आंकते हैं उनको भी और जो पेंटिंग खरीद कर अपने ड्राइंग रूप में सजाना चाहते हैं, उनको भी कमलनाथ प्रभावित करते हैं।   कुछ चित्रों को देख कर लगता है कि ये कमलनाथ ने अपने मन की खुशी के लिये बनाये हैं जबकि कुछ चित्रों को देखकर ऐसा आभास होता है कि इस कलाकार ने यह चित्र बनाते समय इस बात का भी ध्यान रखा होगा कि ये चित्र व्यावसायिक रूप से भी सफल हो !     


वज़ाहुल हक़ ’काशिफ’ की भावनाओं में भी यही विचार प्रतिध्वनित होते हुए लगते हैं।   उनके अनुसार अच्छी कला वही है जो खुशी दे, जिसको देख कर चेहरे पर मुस्कान आये, जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को पोषण मिले ।  उनके अनुसार कमलनाथ की कला इस कसौटी पर खरी उतरती है। 


पत्रकार एवं लेखक डा. वीरेन्द्र आज़म के अनुसार कमलनाथ प्रकृति और प्रेम के चितेरे चित्रकार हैं जिनकी पेंटिंग इठलाती भी दिखती है और खिलखिलाती भी !  उनकी पेंटिंग में श्रृंगार भी है, तरुणाई भी, सांझ की लालिमा भी है और अरुणाई भी !


प्रसिद्ध चित्रकार, लेखक, कवि एवं पूर्व वरिष्ठ आई. ए. एस. अधिकारी आर. पी. शुक्ल के शब्दों में - " कमलनाथ वाटर एक्रेलिक व ऑयल पेंटिंग के सिद्धहस्त कलाकार हैं जिन्होंने अपनी रंगों से भरी तूलिका से कैनवस पर जीवन के विभिन्न पक्षों को अभिव्यक्त किया है।  उन्होंने भारतीय संस्कृति की कलात्मक परंपरा से रस ले कर आधुनिकता को भी चित्रित किया है।

   


 

Categories: Random Thoughts, Socio-cultural

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