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News Diary

A mail from Satish Mittal, Delhi

Posted by Sushant Singhal on December 14, 2011 at 4:05 AM Comments comments (2)

 

We have received the following letter in our mail.  We are reproducing the letter here for the benefit of our readers.  Mr. Satish Mittal also reiterated our suggestion to send emails and letters to the editor on daily basis to press the demand.

Editor

श्री सतीश मित्तल, दिल्ली से प्राप्त पत्र बहुत महत्वपूर्ण है जिसे हम अपने पाठकों के लाभार्थ यहां प्रस्तुत कर रहे हैं ।  श्री मित्तल ने भी इस सुझाव को दोहराया है कि हम सब को नित्य प्रति सैंकड़ों की संख्या में ई-मेल और संपादक को पत्र भेज - भेज कर रेल मंत्रालय पर दबाव बनाना चाहिये ताकि हमारी यह मांग शीघ्र ही पूरी की जाये । 


मेरठ , मुज़फ्फरनगर , सहारनपुर महत्तव पूर्ण शहर हें / मुज़फ्फरनगर तो दिल्ली से केवल लगभग १२० किलोमीटर की दुरी पर है तथा NCR ZONE के एकदम करीब है / मेरठ - मुज़फ्फरनगर- सहारनपुर रेल लाइन पर कुछ अन्य शहर भी है जहाँ पर शुगर / लिकर / उद्योग व् अन्य महत्व पूर्ण उद्योग चल रहे हैं / उनमें दोराला , सकोती , खतोली, मंसूरपुर , रोहाना . व् देवबंद शामिल हैं / मुज़फ्फरनगर उत्तराखंड से सटा है तथा काफी महत्व पूर्ण हैं / इसमें तीर्थ स्थान शुक्रताल गंगा के किनारे स्थित हैं, जिसका ५००० वर्ष पुराना इतिहास हे /  मुज़फ्फरनगर के तिवावी सुगर मिल / तितावी गावं के पास माडी गावं मे खेत मैं खुदाई के दोरान हड़प्पा के समय के सिक्के भी मिले / देवबंद का विशव में अपना महत्त्व है / सहारनपुर भी हरियाणा , उत्तराखंड व् हिमाचल प्रदेश की सीमाओं को छूता है । सहारनपुर एक पुराने रेल मार्ग में हे तथा रेल जंक्शन है /  शाकुंभरी देवी , सहारनपुर के पास बेहट से कुछ किलोमीटर दूरी पर है / आई.आई.टी. रुड़की, व् रूडकी छावनी उत्तराखंड पास ही हे / एयर फोर्स सरसावा एयर बेश , डाक व तार प्रशिक्षण कालिज भी सहारनपुर में हे उत्तराखंड बन्ने से पहले तक हरिद्वार और रुड़की भी सहारनपुर में थे जो अब हरिद्वार जिले के गठन के बाद उत्तराखंड में शामिल हो गये हैं।इतना सब होने पर भी क्या यह दुर्भाग्य नहीं की भारतीय रेल ने मेरठ , मुज़फ्फरनगर -देवबंद सहारनपुर तक के रेल मार्ग को दोहरा करने के कार्य को अभी तक भी हाथ तक नहीं लगाया हे / इस मार्ग के दोहरीकरण न हो पाने से खुद रेलवे को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा हे / रेल गाड़ियाँ लेट चल रहीं हे . रेल ट्रेक अति व्यस्त हे / कभी भी सर्दियों में रेल ट्रेक दरक जाता हे / अभी हल ही में मुज़फ्फरनगर के पास रेल ट्रेक टूट गया था /रेल स्टाफ पर काम का दबाव बहुत अधिक हे / कम शटल चलने से रेलवे को आर्थिक हानि हो रही है, रेलयात्रियों को परेशानी तो हो ही रही हे /रेल मार्ग के दोहरा हो जाने से सहारनपुर-- ना गल - देवबंद मुज़फ्फरनगर- खतोली- दोराला मेरठ- मोदी नगर - गाजियाबाद से दिल्ली तक की यात्रा बहुत कम समय में पूरी की जा सकती है किन्तु सिंगल ट्रेक होने से मेल व एक्सप्रेस ट्रेन को भी घंटों लग रहे हैं। डीजल अधिक लगने से धन की बरबादी हो रही है। मार्ग के दोहरा न होने के कारण यात्रियों की अधिकता होने पर भी इस मार्ग पर दशकों से नई शटल ट्रेन नहीं चलाई जा रही है / मेने सहारनपुर के जे वि जैन कोलिज से वर्ष १९७७ से १९८१ अध्यन किया तब से लेकर यानि मेरे कोलिज period से वाही ट्रेन चलाई जा रही हेएक ट्रेन को नि कालने के ट्रेनों छोटे –छोटे स्टेशनों पर असुरक्षित खड़ा करना पड़ता है। रूडकी - लक्षर- हरिद्वार रेल मार्ग पर दशकों से वाही शटल चल रही हे / जबकि आबादी बहुत बढ़ चली /



मेरठ- मुज़फ्फरनगर , दोराला , सकोती , मंशुरपुर , खतोली , देवबंद , नांगल , टापरी सहारनपुर व आस – पास के क्षेत्र के लोगों के लिये दिल्ली जाने का सबसे सस्ता व आसन साधन रेल ही है, बशर्ते रेल शटल समय पर उपलब्ध हो। यदि रेलवे द्वारा इस मार्ग का दोहराकरण कर दिया जाये व् हर आधा घंटे में शटल सहारनपुर - मुज़फ्फरनगर - मेरठ से दिल्ली- गाजियाबाद के लिए चलयी जाये / तो रेल की आय व् रेल यात्रियों की बल्ले बल्ले हो जाए / ग्रामीण क्षेत्रों में पड़ने वाले गावं व् नांगल - देवबंद - रोहना -मंशुरपुर - खतोली -सकोती - दोराला - मोदीनगर - गाजियाबाद - के बहुत से लोगों को रोजगार शिक्षा का फायदा होगा / हाई वे ५८ पर भी वाहन कम किये जा सकते हैं /। रेलवे शटल न चला जहाँ लोगों को असुविधा का कारन बन रही हे वहीँ आर्थिक नुकसान भी उठा रही है।आय का काफी बड़ा स्रोत ख़त्म कर रही हे /एक ओर राज्य सरकार व् केन्द्रीय सरकार मेरठ और दिल्ली के बीच में तीव्रगामी मैट्रो रेल के प्रस्ताव स्वीकार कर रही है वहीँ दूसरी ओर मेरठ - मुज़फ्फरनगर - देवबंद - सहारनपुर के रेल मार्ग को दोहरा नहीं किया जा रहा है केवल सर्वे की बात की जा रही है । हालाँकि लोगों व् जनप्रतिनिधियों द्वारा रेल बजट आने से पहले ज्ञापन रेलमंत्री व् संबोधित प्रशासन को भेजे जा रहे हैं, व् यहाँ तक की राज्य सभा मे भी मार्ग के दोह्राकरण के प्रशन उठाये जा रहें है परन्तु उन पर क्या कार्यवाही हुई, किसी को ज्ञात नहीं है। अर्थात वहीँ रिजल्ट जीरो /ब्लोग के माध्यम से रेल मंत्रालय, रेल मंत्री जी व् जन प्रतिनिधि से अपार जन हित में अनुरोध हे की मेरठ- टापरी के रेल मार्ग को दोहरा किया जाए तथा साथ ही यहाँ के निवासीयों से अपील हे विशेषकर गाजियाबाद - मोदीनगर - मेरठ - दोरला -सकोती - खटोली - मंसूरपुर -रोहना -देवबंद -नांगल ,मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर, रूडकी हरिद्वार, लक्सर देहरादून व आस पास के क्षेत्रों के लोगों द्वारा लाइन के दोह्राकरण के लिए आवाज उठानी चाहिए /उत्तरप्रदेश राज्य मे आगामी चुनाव में उसी पार्टी को वोट किया जाए जो इस सम्बन्ध में तुरन्त कदम उठाये / तथा मिडिया का प्रयोग कर मामले को उठाया जाये / मिडिया से भी ऐसी ही अपील हे /रेल मंत्रालय को हर रोज़ ई मेल प्रेषित की जायें और अपनी मांग दोहराई जाये ।रेलगाड़ियों में, रेलवे स्टेशनों पर स्टिकर लगा कर अपनी मांग के लिये जन-समर्थन जुटाया जाये। तथा अन्याय को उजागर किया जाए /लोकपाल की आवाज वाले भी इस आवाज को उठायें / काले धन के साथ इस और भी ध्यान खीचा जाए / उत्तरप्रदेश के आगामी चुनावी सभा मे इस मांग को पुरजोर से उठाया जाए /शायद केंद्र सरकार वर्ष २०१२ के आगामी रेल बजट में इस रेल मार्ग को दोहरा कर न के लिए कुछ कदम उठाये|  

- सतीश मित्तल, दिल्ली

skumar630@yahoo.co.in



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    umesh rajpal

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