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पांवधोई नदी का मिशन जारी रहे- आलोक कुमार
जिले की ऐतिहासिक पांवधोई नदी के अस्तित्व को बचाये रखने के लिये बचाव समिति के अध्यक्ष व पूर्व जिलाधिकारी आलोक कुमार ने जनता से अपील की। शुरू से ही पांवधोई अभियान से जुडे रहे जिलाधिकारी एवं पांवधोई बचाव समिति के संस्थापक आलोक कुमार शनिवार रात जनपद की पांवधोई नदी पहुंचे।
इलाहाबाद में कार्यरत डीएम आलोक कुमार का शनिवार शाम रेलवे स्टेशन पहुंचने पर एसडीएम हरिकेश चौरसिया, डाक्टर एस.के. उपाध्याय, आमिर खान, इकरार अंसारी, प्रीतम कपूर समेत भारी संख्या में लोगो ने फूल मालायें पहनाकर जोरदार स्वागत किया। इसके बाद आलोक कुमार पांवधोई समिति के सदस्यों के साथ धोबी घाट स्थित पांवधोई नदी पहुंचे और नदी के चारों ओर दीपक व मोमबत्तियां जलाकर दीपावली मनाई ।
पांवधोई बचाव समिति के संस्थापक अध्यक्ष पूर्व जिलाधिकारी आलोक कुमार ने कहा कि वह भले ही दूसरे जिले में सेवारत हो, परंतु इस मिशन से उनकी आत्मा अब भी जुडी है। उन्होने कहा कि सहारनपुर की जनता से सहयोग से चले इस अभियान की मिसाल दूसरे जिलों की जनता को दी जाती है। उन्होने कहा कि इस मिशन की सार्थकता तभी सम्भव है, यदि यह मिशन लगातार जारी रहे। उन्होने सहारनपुर की जनता से इस मिशन में अधिक से अधिक सहयोग करने की अपील की।
इस दौरान विनय जिंदल, केएल ठक्कर, मनमोहन, मनोज गुप्ता, मसरूर, एके श्रीवास्तव प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
सीबीएसई बालक वर्ग की बास्केटबाल प्रतियोगिता
सेंट मैरीज स्कूल में सीबीएसई बालक वर्ग की बास्केटबाल प्रतियोगिता का आगाज़ रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ हुआ। प्रतियोगिता में पहुंची कई जिलो के स्कूली बच्चों की टीम अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी।
चिलकाना रोड स्थित स्कूल में आयोजित प्रतियोगिता का उदघाटन अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन एडवोकेट लियाकत अली एवं आईटीसी के ब्रांच मैनेजर गौरव तायल ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर किया। कार्यक्रम में पधारे अतिथियों ने सभी खिलाडियों को खेल की भावना से खेलने की शपथ दिलाते हुए कार्यक्रम की शुरूआत की। इसी दौरान छात्र-छात्राओं ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया।
मुख्य अतिथि लियाकत अली एडवोकेट ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि यह हमारे जनपद के लिये सौभाग्य की बात है कि इतना बडा कार्यक्रम सहारनपुर की धरती पर होने जा रहा है। इससे बास्केट बाल के खिलाडियों को नई उर्जा प्रदान होगी और वे नई चीजों का ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे। गौरव तायल ने कहा कि आज के समय में बच्चों में खेलों के प्रति काफी रूचि दिखाई देती है और यही रूचि एक दिन देश को सम्मान दिलाने का काम करेंगी। उन्होने विश्वास दिलाया कि इस प्रतियोगिता का आयोजन खिलाडियों के लिये निश्चित रूप से लाभप्रद सिद्ध होगा।
प्रतियोगिता के शुरूआती मुकाबले में आशा मार्डन स्कूल सहारनपुर ने केडीबी गाजियाबाद की टीम को 38 रनो से मात दी। इसमें गाजियाबाद की टीम की झोली में 12 अंक व आशा माडर्न स्कूल की झोली में 50 अंक आये। दूसरें मुकाबले में सेंट मैरीज इटावा की टीम ने इंदिरापुरम गाजियाबाद की टीम को पराजित किया। इसमें इटावा को 30 और गाजियाबाद को 17 अंक हासिल हुये। बुलंदशहर की टीम का मुकाबला सहारनपुर के आशा माडर्न इंटरनेशनल की टीम के साथ हुआ। इसमे बुलंदशहर की टीम ने कुल 24 अंक अर्जित किये। आशा माडर्न इंटरनेशनल स्कूल की टीम को इसमें मात खानी पड़ी । आजाद पब्लिक स्कूल ने 50 अंक अर्जित करते हुए एप्पल ग्रोव स्कूल की टीम को करारी हार का सामना कराया।
प्रतियोगिता के दौरान सेंट मैरीज स्कूल की प्रधानाचार्या सुषमा बजाज, रेनबो की प्रधानाचार्या नरगिस मलिक, सहारनपुर पब्लिक स्कुल से सुधीर जोशी, आलम राणा, सरदार दलजीत सिंह कोचर, आरके धवन प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
विभावरी द्वारा लोकगीत गायन प्रतियोगिता का आयोजन
नगर की सुप्रसि़द्ध, साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था विभावरी द्वारा पदमश्री राम नारायण बागले, स्मृति चल वैजयन्ती प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में गीत एवं लोकगीत की प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया।
महाराज सिंह कालेज के व्याख्यान कक्ष में आयोजित प्रतियोगिता की अध्यक्षता आईआईटी रूडकी से पधारें हिंदी साहित्य अकादमी के सदस्य डा योगेंद्र नाथ शर्मा ने की। नगर के चिकित्सक डाक्टर राजकुमार शर्मा, एमएस कालेज के प्राचार्य डा के के शर्मा एवं हरिद्वार से पधारे गीतकार दिनेश कुमार शर्मा व रमेश रमण ने मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर प्रतियोगिता की शुरूआत की। प्रतियोगिता में अली जाफर, सलमान, सचिन, विनीता, चेतना, उदित अरोडा, एकता, सार्थक, कपिल, कविता चैधरी, मोनिका शर्मा, पलक तोमर ने अपने गीत एवं लोकगीतों से सभी की वाहवाही लूटी।
कविता चौधरी ने "भाईयों के भाई हउ पुतवों के भाई ऐं, पलक तोमर ने जगदम्बा माई" तथा सार्थक कौशिक ने "ये तो प्रेम की बात है" पर मनमोहक प्रस्तुति दी। सरस्वती विद्या मंदिर के विद्यार्थियों को चल वैजंती प्रदान की गयी।
संस्था के संरक्षक हरित, जेके तायल, डाक्टर एसएस कुमार ने सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। संस्था ने उन बालक-बालिकों को भी सम्मानित किया जिन्होने अपने स्कूलों में सर्वोच्च अंक हासिल किये। जिसमें नीरज वर्मा, मीनाक्षी लांबा, कुंजन सिंह और नेहपाल प्रमुख रहे। निर्णायक मंडल में शामिल रहें प्रहलाद, आतिश व नीलम अग्रवाल ने भी अपने गीतों से सभी को भावविभोर कर दिया। प्रतियोगिता की अध्यक्षता कर रहे डाक्टर अरूण ने "मां ने मुझसे इक रोज कहा, करता चल सबको राम-राम" गीत सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रतियोगिता के अंत में संस्था अध्यक्ष कश्मीर सिंह द्वारा अतिथियों को स्मृति चिंह प्रदान किये गये। कार्यक्रम में डा गुरचरण सिंह मेहता, आदेश शर्मा, बालेश्वर जैन, सुरेश, हेमंत, डा सागर, नरेंद्र मस्ताना, लालाराम, केके बंसल, हरिओंम गणपति सहस्त्रबु़द्धे सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।
सहारनपुर क्लब को मिला तरणताल

सहारनपुर क्लब द्वारा संस्था परिसर में नव-निर्मित तरणताल का आज उदघाटन किया गया। बाजोरिया मार्ग स्थित सहारनपुर क्लब में नवनिर्मित स्वीमिंग पुल का उदघाटन कमिश्नर सुरेश चंद्रा, जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर व इलाहाबार के जिलाधिकारी आलोक कुमार ने संयुक्त रूप से किया। मंडलायुक्त सुरेश चंद्रा ने संस्था के पदाधिकारियों एवं सदस्यों को स्वीमिंगपुल जैसी सुविधाओं के लिये बधाई दी। उन्होने कहा कि जनपद में खेल, योग एवं बेहतर स्वास्थय के लिये संस्थाओं को सहयोग करना अत्यधिक आवश्यक है। जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर और आलोक कुमार ने जनता से ऐसी संस्थाओं को अधिक से अधिक सहयोग प्रदान करने की अपील की। अधिकारियों ने स्वीमिंग पुल कमेटी के चेयरमैन डाक्टर टी आर मखीजा के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हे बधाई दी। इस दौरान नन्हे मुन्हे बच्चों द्वारा अनेक रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। इस दौरान आईटीसी के शाखा प्रबंधक गौरव तायल, सचिव केजी अग्रवाल, कार्यकारिणी सदस्य जेबी सिंह, संयुक्त सचिव अरूण कुमार गुप्ता समेत भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के आह्रवान पर चलाये जा रहे व्यापार बचाओं देश बचाओं आंदोलन के लिये जनपद के व्यापारी भी एकजुट होते नजर आ रहे है। व्यापारिक संगठन ने नवम्बर से शुरू हो रही रथयात्रा के लिये भी व्यापारियों से अधिक से अधिक संख्या में जुटने का आह्रवान किया है।
व्यापारियों का "शोषण व उत्पीड़न" बर्दाश्त नहीं
घंटाघर चौक स्थित एक सभागार में पत्रकारों से वार्ता करते हुए व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष विमल विरमानी ने कहा कि रथयात्रा 9 नवम्बर को लखनऊ से शुरू होकर 60 से अधिक जिलो से गुजरेंगी। उन्होने कहा कि सहारनपुर में रथयात्रा का आगमन नवम्बर माह के अंत में होगा। उन्होने कहा कि जिलो में मिलावटखोरी रोकने के नाम पर व्यापारियों का उत्पीडन चरम सीमा पर है। अधिकारी असली माफियाओं को पकड़ने के बजाय व्यापारियों को बदनाम करने का काम कर रहे है। उन्होने कहा कि उनका संगठन मिलावटखोरों के साथ नही है, परंतु व्यापारी वर्ग का उत्पीडन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नही किया जायेगा। उन्होने बताया कि टैक्स, छापों व सर्वे के माध्यमों से व्यापारियों का शोषण किया जा रहा है। वार्ता के दौरान जिला महामंत्री नुसरत साबरी, बुडाराम सडाना, अनिल गर्ग प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
रोजगार प्रशिक्षण शिविर का आयोजन
ग्रामीण विकास मंत्रालय की स्वर्ण जयंती रोजगार योजना के अंतर्गत रोजगार प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 50 से अधिक युवको को प्रशिक्षण दिया गया।
मंडी समिति रोड स्थित एक सभागार में आयोजित शिविर में सुरक्षाकर्मी की उपयोगिता और उसके कर्तव्यों की जानकारी दी गयी। कार्यशाला में आये सभी युवकों को रोजगार मैनेजर गीता चावला ने प्रमाण पत्र वितरित कर उनका हौसला बढाया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए खालिद हसन ने कहा कि इस शिविर का उददेश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले अधिक से अधिक युवको को रोजगार उपलब्ध कराना है। शिविर में प्रमोद कुमार, जहूर, देवेंद्र, सतेंद्र सिंह, पूर्णिमा, शबा आदि प्रमुख रूप् से मौजूद रहे।
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सरकार का कहना है कि लोकपाल बिल पास कराने के लिये समय-सीमा तय करने के लिये कहना उसके साथ बहुत बड़ी ज्यादती है। सरकार का कहना है कि वह इस मामले को 42 वर्षों से लटकाते चले आ रहे हैं और अब अन्ना हैं कि 30 अगस्त तक बिल पास कराना चाहते हैं ! सरकारी काम इस स्पीड से हुआ करते हैं क्या?
सरकार का कहना बिल्कुल सही है। अगर सरकारी कर्मचारी, अधिकारी और मंत्री जनता के काम तुरत-फुरत करने लगें फिर तो हो ली कमाई ! अगर अधिकारी किसी काम को सालों साल तक न लटका कर रखें तो उनकी पूछ ही खत्म हो जायेगी ! दिनों का काम महीनों में और महीनों का काम सालों में करते हैं तब ही तो लोग नोटों के ब्रीफ केस लेकर आगे पीछे घूमते हैं कि “सर, हमारा काम थोड़ा जल्दी करा दीजिये ! ये ब्रीफकेस आपके बच्चों के मिठाई के वास्ते ! ” अगर आवेदन पत्र आते ही स्वीकृति के हस्ताक्षर करने पड़ें तो अफसर और बाबू में फर्क ही क्या रह जायेगा ? सरकारी काम-काज में देरी ही तो वह मूल मंत्र है जिससे पूरा एक भ्रष्ट तंत्र फल-फूल रहा है। न जाने कितने लाख दलालों के परिवार की रोजी रोटी इसी देरी को कम करवाने से चलती है। आप सीधे अफसर या मंत्री को घूस देने का प्रस्ताव नहीं कर सकते । उसके लिये आपको थ्रू प्रोपर चैनल जाना होता है और वह चैनल है दलाल !
आपको ड्राइविंग लाइसेंस चाहिये, राशन कार्ड चाहिये, पासपोर्ट बनवाना हो, अपना ट्रांसफर करवाना हो या रुकवाना हो तो अधिकारियों का काम होता है उसमें यथासंभव फच्चर अड़ाना, कानूनी बारीकियां दिखा कर, आपके प्रार्थनापत्र में बीस नुक्स निकाल कर आपको इधर से उधर, उधर से इधर भटकने के लिये विवश करना । फिर कोई दलाल आपके पास आता है तो आपके ज्ञान चक्षु खुलते हैं कि इतने पैसे देने से सारी कानूनी विवशतायें समाप्त हो जायेंगी और आपके प्रार्थनापत्र पर साब हस्ताक्षर कर देंगे। कई बार लोग अपने विधायक या सांसद के पास जाते हैं कि उनकी चिठ्ठी से काम बन जायेगा पर अफसरों का स्पष्ट मत है कि घोड़ा घास से यारी करेगा तो खायेगा क्या ! कुछ काम बड़े स्तर के होते हैं जो प्रशासन के स्तर के न होकर शासन के स्तर के होते हैं। इनमें मंत्रियों की अनुकूल टिप्पणी या नीतिगत स्तर पर फैसले की आवश्यकता होती है। यहां आपकी सेवा आपके सांसद और विधायक करते हैं जो आपका काम कराने के लिये ठीक उसी प्रकार जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेते हैं जैसे दलाल लोग करते हैं।
अदालतों में यह दलाली की जिम्मेदारी वकीलों के कंधों पर है। जो जज के मुंहलगे वकील हैं, वह आपका मनपसंद फैसला निश्चित समय सीमा में करा सकते हैं । इसीलिये आज कल मुकद्दमें का फैसला सुरक्षित रखने का फैशन चल पड़ा है। फैसला “सुरक्षित” कर देने के बाद दलालों का काम शुरु होता है, जिस पक्ष का ब्रीफ केस ज्यादा भारी हो, उसका भाग्य संवर जाता है। हफ्ता या महीना इसी काम के लिये दे दिया जाता है।
लोकपाल बिल का भी जहां तक संबंध है, इसमें अन्ना पार्टी को और देश को समझाया जा रहा है कि इसमें बहुत सारी तकनीकियां हैं, विवशतायें हैं, गंभीर विचार-विमर्श की आवश्यकता है, सर्वदलीय बैठक होगी, स्टैंडिंग कमेटी इस पर विचार करेगी उसके बाद संसद में इस पर बहस होगी और वोटिंग होगी, बिल पास होगया तो राष्ट्रपति की मंजूरी के लिये जायेगा। उनके स्तर पर भी कई वर्ष लग सकते हैं। यह कोई सांसदों का वेतन तिगुना करने जैसा महत्वपूर्ण मामला थोड़ा ही है कि तीन मिनट में पास करना पड़े ! न कोई स्टैंडिंग कमेटी, न बहस, ना ही वोटिंग ! इधर विधेयक पर निगाह पड़ी और उधर तुरंत पास ! जो मामला बयालीस साल तक प्रतीक्षा कर सकता है, वह बयालीस साल और प्रतीक्षा नहीं कर सकता क्या?
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सर्वजन के हितों की पार्टी है कांग्रेस: राजबब्बर
सहारनपुर: (सैनी
। कांग्रेस वर्किंग कमैटी के सदस्य व फिरोजाबाद से सांसद राजबब्बर ने आज सहारनपुर के जिला काग्रेंस कार्यालय पर आयोजित पार्टी के कार्यकता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहाकि कांग्रेस सर्वजन की पार्टी है और वह सभी लोगों को हित चाहती है आज के समय कांग्रेस द्वारा चलाई गई योजना मनरेगा ही गरीबों का पेट भरने का काम कर रही है और इसके अलावा अन्य सरकारों ने गरीब जनता को धोखा देकर हमेशा छलने का काम किया है उन्होने कहा कि आज अगर कोई अधिकारी बेईमानी करता है तो समस्त जनता को यह अधिकार है कि वह सूचना के अधिकार के जरिये उससे जानकारी ले सकता है। कांग्रेस की सरकार की ही देन है कि आम आदमी को भी इतना बडा अधिकार दिया गया है। उन्होने कहा कि आने वाला कल कांग्रेस का होगा इसलिए आज जनता उसके साथ जुड रही है उन्होने कहा कि बसपा की सत्ता किसी से छिपी नही है और न ही अन्य पार्टियों का शोषण लोग भूले हैं । उन्होने कार्यकर्त्ताओं को संजीवनी देते हुए कहा कि आज कांग्रेस के युवा कार्यकताओं के दम पर कांग्रेस लगातार आगे बढ रही है । इसलिए युवाओं को चाहिए की वह पार्टी की नीतियों को बढ-चढ कर प्रचारित करें और आम आदमी को पार्टी से जोड़ें तभी पार्टी आगे बढ सकती है ।
बीएड बेरोजगारों ने किया काले झंडे लेकर प्रर्दशन
सहारनपुर
सैनी
। उत्तर प्रदेश स्नातक प्रशिक्षित स्नातक संघ के सदस्यों ने आज बेरोजगारी की समस्या को लेकर क्लैक्टैट के गेट पर प्रर्दशन किया और बसपा सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाये और इसके बाद मुख्यमत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा ।
अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार आज बीएड बरोजगारों ने अपनी बेरोजगारी की समस्या को लेकर काले झंडे लेकर प्रर्दशन किया और बीएसपी मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए कहा कि सरकार द्वारा बीएड बेरोजगारों की लगातार अनदेखी की जा रही है वह पिछले काफी समय से प्रर्दशन कर रहे है लेकिन उनकी कोई सुनवाई नही हो रही है जब तक उनकी सुनवाई नही होती तो वे लगातार अपना प्रर्दशन जारी रखेंगे । इसके बाद उन्होने एक ग्यापन भी सौंपा । ज्ञापन सौंपने वालों में जिला अध्यक्ष विजेन्द्र कुमार, अरूण उग्र, नफे सिंह के अलावा भी सैकडों बीएड बेराजगार उपस्थित थे ।
अन्ना के साथ हम सभी भारतीयों की जीत है: आई आई ए
सहारनपुर: (सैनी
। आई आई ए के पदाधिकारियों ने आज अन्ना हजारे की मांगे मान लिये जाने पर अपनी खुशी का इजहार करते हुए मिठाई वितरित की और कहाकि अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार को रोकने हेतु जो पहल की है। और वह काबिले तारिफ है आखिरकार उसकी सभी मांगों पर सरकार को झुकना पडा है यह सभी भारतीयों की जीत है पहली बार लोग इस मुददे को लेकर इतनी बडी संख्या में जागरूक हुए है और उन्होने अन्ना का साथ दिया है भ्रष्टाचार के मुददे पर आई आई ए ने भी उनका साथ देने की घोषण की थी । इस दौरान काफी संख्या में उद्यमी मौजूद थे ।
गाडा समाज ने समाजवार्दी पार्टी का पुतला फूंका
सहारनपुर: (सैनी
। गाडा युवा मंच के सदस्य आज मल्हीपुर रोड पर स्थित अपने पार्टी कार्यालय पर इकटठा हुए और उन्होने इस अवसर पर समाजवादी पार्टी का पुतला फूंका। उन्होने कहा कि सपा द्वारा जो टिकटों की घोषणा की गई है उसमें कही पर भी गाड़ा समाज के लोगों को टिकट नही दिया है पिछले काफी समय से कुछ चुनिंदा नेता वोटो के नाम पर लोगों को छलने का काम कर रहे है । उन्हाने कहा कि जब सांसद रशीद मसूद अपने भतीजे के लिए टिकट की मांग कर सकते है तो गाडा समाज के लिए क्यो नही मांग सकते है । इस दौरान फरहाद गाडा,मौ अहसान, अनीस गाडा,फारूख गाडा ,महताब, इकरार, शाहिद बिलाल आदि लोग उपस्थित थे ।
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देश में संभवतः ऐसा पहली बार इतनी स्पष्टता के साथ परिलक्षित हुआ है कि निर्वाचित जन-प्रतिनिधि और अफसरशाही कुछ और कानून चाहती है और जनता कुछ और कानून चाहती है। बावजूद इसके कि वर्ष 1968 से टाल-मटोल करते हुए ठंडे बस्ते में डाले जा रहे लोकपाल बिल में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो भ्रष्टाचारियों पर अंकुश लगा सके, हमारे जन-प्रतिनिधि उस डेढ़ टांग के, नख-दंत विहीन लोकपाल बिल को भी कानून न बनने देने के लिये कृत-संकल्प रहे हैं। दूसरी ओर, जनता एक ऐसा कानून चाहती है जो भ्रष्टाचार के विरुद्ध वास्तव में प्रभावी हो सके और देश को लूट-खसोट से बचा सके।
इससे पहले भी अनेकों बार ऐसा होता रहा है कि हमारे निर्वाचित जन-प्रतिनिधि जनता के व्यापक हित के लिये नहीं, अपितु अपने निहित स्वार्थों की रक्षा के लिये, अपना व्यक्तिगत हित संवर्द्धन करने के लिये कानून बनाते रहे हैं। शाहबानों का मामला हो, इंदिरा गांधी को चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहराने का इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय रहा हो, समान नागरिक संहिता को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय की अनुशंसा हो, चुनाव प्रणाली में व्यापक सुधारों के लिये व अपराधियों को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराये जाने के लिये दिये गये सुझाव हों, हमारे निर्वाचित जन-प्रतिनिधि, विशेषकर सत्तासीन राजनीतिबाज कानून के विरोध में खड़े दिखाई देते रहे हैं। न्यायपालिका की आवाज़ को भी एक सुर से नकारते रहे हैं। ऐसा कोई भी प्रयास वह सफल नहीं होने देना चाहते जिससे उनके नाक में नकेल पड़ने की आशंका हो।
जनता यह भी देखती चली आ रही है कि हमारे सांसद व विधायक जब चाहे, जितना चाहे, अपना वेतन व भत्ते बढ़ा लेते हैं और इसके लिये उनको कोई आंदोलन भी नहीं करना पड़ता। बस, आज मन कर गया कि वेतन तीन गुना होना चाहिये तो कानून बना लिया कि आज से वेतन तीन गुना और भत्ते दस गुना मिलेंगे। सो सिंपल ! पहले पांच वर्ष तक सांसद और विधायक के रूप में कार्य करने के बाद ही पेंशन मिलती थी, मन आया और कानून बना लिया कि “नहीं, एक दिन के लिये सांसद / विधायक बनने के बाद भी पेंशन मिला करेगी !” सो सिंपल !
हमारे देश में विधायक / सांसद बनने के लिये भारत का नागरिक होना और पच्चीस वर्ष की आयु का होना पर्याप्त है इसके अतिरिक्त और कोई योग्यता नहीं चाहिये। सांसद या विधायक हेतु चुनाव तो आप जेल में पड़े-पड़े भी लड़ सकते हैं। दूसरी ओर चपरासी बनने के लिये भी अच्छे चरित्र का होना और कम से कम आठवीं तक की शिक्षा तो होनी ही चाहिये। यदि चुनाव आयोग या अन्य कोई संस्था इस दिशा में कुछ सुधार के उपाय सुझाये तो सारे राजनीतिक दल उसका विरोध करने लगते हैं। हमारे जन-प्रतिनिधियों को अपने ऊपर कोई भी अंकुश नहीं चाहिये। उनके कुछ विशेषाधिकार हैं सो अलग ! उनको अनेकों मामलों में कानूनी संरक्षण (इम्यूनिटी) मिला हुआ है।
इन सारी विकृतियों को कौन दूर करेगा? जनता या ये जन-प्रतिनिधि? तवलीन सिंह कहती हैं (अमर उजाला – 10 अप्रैल) कि कानून में परिवर्तन सिर्फ जन-प्रतिनिधि करेंगे। कानून बनाना जनता का काम नहीं है, सांसदों व विधायकों का है। पर सवाल तो यही है कि सांसदों, विधायकों और अफसरशाहों को नियंत्रण में रखने के लिये, उनके भ्रष्टाचार पर काबू पाने के लिये कानून भी क्या वे खुद ही बनाना चाहेंगे ? आज तक तो उन्होंने ऐसा कुछ किया नहीं है! इसके सर्वथा विपरीत उन्होंने तो इस राह में हर प्रकार से रोड़े ही अटकाये हैं। फिर, उनको कैसे नियंत्रित किया जायेगा?
एक निर्वाचित प्रतिनिधि किस प्रकार का कानून बनाना चाहेगा ? स्वाभाविक रूप से, सबसे पहले तो वह यह चिन्ता करेगा कि ऐसा कानून बनाया जाये जो अगली बार के चुनाव में भी उसकी जीत पक्की हो सके। एक व्यक्ति करोड़ों रुपये खर्च करके चुनाव लड़ता है (और हर बार चुनाव आयोग द्वारा तय की गई चुनावी खर्च की सीमा को कम बताते इसमें और बढ़ोतरी भी चाहता है) तो क्या इसलिये कि उसे कानून बनाने का बहुत तजुर्बा है, योग्यता है और वह देश हित में कानून बनाना चाहता है? हा-हा-हा ! जी नहीं, वह करोड़ों रुपये इसलिये खर्च करता है कि अगले पांच वर्षों में इतना कमा सके कि अगली सात पुश्तों तक का जुगाड़ हो जाये। सारी ज़िन्दगी के लिये मोटी पेंशन बंध जाये, और माननीय कहलाये सो अलग !
तवलीन सिंह कहती हैं कि यदि आप जन-लोकपाल कानून बनवाना चाहते हैं तो उसे कानून मंत्री को दीजिये, वह बनायेंगे कानून ! कानून बनाना जनता का काम नहीं है। बिल्कुल ठीक कहा तवलीन सिंह ने। पर 1968 से अब तक बनाया क्यों नहीं ? और अब भी, दिसंबर से अब तक अन्ना हज़ारे और उनके साथी प्रधान मंत्री, गृह मंत्री, कानून मंत्री, नेता प्रतिपक्ष, सी.पी.आई., सी.पी.एम., लोकसभाध्यक्ष, राज्यसभा के सभापति, विभिन्न राजनीतिक दलों के अध्यक्षों से मिल कर यही सारे प्रयास तो कर रहे थे। प्रधानमंत्री को छः चिठ्ठी भेजीं जो वह हज़म कर गये और डकार तक नहीं ली। गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने टका सा जवाब देकर वापिस लौटा दिया । सोनिया गांधी ने मिलने का समय तक नहीं दिया । सत्ता प्रतिष्ठान में बैठा हर व्यक्ति यही सोचता रहा कि भौंक रहे हैं, भौंकने दो!
वैसे तवलीन सिंह की जानकारी के लिये बता देना उचित होगा कि लोकतंत्र की वर्तमान पद्धति पर आकर मानव बुद्धि की सीमा समाप्त हो जाती हो, ऐसा नहीं है। “राजा खुद कानून बनाये” - यह तरीका तात्विक दृष्टि से सरासर गलत है। कानून बनाना ऐसे विद्वानों का काम है जो संत मनोवृत्ति के हों, पूरे देश के व्यापक हित में, आने वाली पीढ़ियों के व्यापक हित में सोच सकने लायक बुद्धि व मनोवृत्ति रखते हों । हमारे जन-प्रतिनिधि भले ही देश की संसद में या प्रदेश की विधान सभा में बैठते हों, पर उनकी सोच तो निहायत बौनी है। वह अपने परिवार और अपने स्वयं के हित साधने के बाद, सिर्फ अपने चुनाव क्षेत्र, अपने वोट बैंक और अपने चन्दा दाताओं का हित साध सकते हैं, इससे अधिक उनसे अपेक्षा करना मूर्खता ही है। भारत में कानून बनाने की जिम्मेदारी जंगलों में रह कर शिक्षा व ग्यान की खोज में लगे रहने वाले ऋषियों – मुनियों की रही है जो स्वयं कुटिया बना कर, धन-वैभव, सत्ता से दूर पठन-पाठन में लीन रहते थे। राजा का काम सिर्फ कानून का शासन स्थापित करना हुआ करता था, कानून बनाना राजा की जिम्मेदारी नहीं थी।
आज हमारे देश में लोकतंत्र है जिसमें जन-प्रतिनिधियों को ही कानून बनाने हैं तो हमें अपने जन-प्रतिनिधियों पर इतना अंकुश रखना तो सीखना ही होगा कि वह देशवासियों को लूट-खसोट कर अपने स्विस खातों में धन जमा न करने लगें। हमें इतनी व्यवस्था तो करनी ही होगी कि वह अपने हित की, अपने आगामी चुनाव की, अपने चन्दा दाताओं की चिन्ता कम करें और पूरे देश की चिंता ज्यादा करना सीखें। ममता बैनर्जी जैसी नेताओं को सिखाना होगा कि वह पूरे देश की रेल मंत्री हैं, न कि सिर्फ पश्चिम बंगाल की। बिहार में व्यापक नर-संहार के बाद जब मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से कहा गया था कि आपको वहां जाना चाहिये तो उनका उत्तर था – “हम उहां कूं जायें, ऊ का हमका वोट देवत हैं !!!!“ इतनी घटिया, निकृष्ट सोच रखने वाले जन-प्रतिनिधियों के भरोसे तवलीन सिंह बैठना चाहें तो उनको रोका नहीं जा सकता, वह स्वतंत्र हैं। पर यह देश और अब इसकी जाग उठी जनता अपने जन-प्रतिनिधियों की नाक में नकेल डाले बिना शांत बैठने वाली नहीं है। अपराधियों, भ्रष्टाचारियों को जेल तक पहुंचाने का, उनकी समस्त संपत्ति जब्त करने का कानून हमें अविलम्ब चाहिये। यही नहीं, हमें नाकारा, भ्रष्ट जन-प्रतिनिधियों को वापिस बुलाने का अधिकार भी चाहिये और चुनाव में खड़े सभी अपराधियों को रिजेक्ट करने का विकल्प भी चाहिये ।
तवलीन जी, सच तो यह है कि देशवासियों के मन में अपने जन-प्रतिनिधियों के प्रति इतना अधिक गुस्सा, क्षोभ और अविश्वास किसी के भी हित में नहीं है पर अगर आज ऐसा है तो इसका दोष मूलतः हमारे जन-प्रतिनिधियों और उनको चुनने की हमारी व्यवस्था का ही है। आज केवल भ्रष्ट लोग ही चुनाव लड़ सकते हैं, जीत सकते हैं । चुनाव लड़ने के लिये ईमानदार आदमी करोड़ों रुपये कहां से लायेगा और भला क्यों खर्च करेगा? इस सारी भ्रष्ट व्यवस्था को अन्ना हज़ारे के पीछे खड़ी जनता की अदम्य ताकत के भरोसे ही बदला जा सकता है। अन्ना हज़ारे स्वयं में कोई ताकत नहीं हैं, वह तो जनता के क्षोभ रूपी तूफान की नभ-स्पर्शी लहरों पर सवार एक नाविक हैं जो उस क्षोभ जनित ऊर्जा को भ्रष्ट व्यवस्था में परिवर्तन हेतु उपयोग कर रहे हैं।
सुशान्त सिंहल
संपादक, द सहारनपुर डाट काम
संदर्भ – तवलीन सिंह का 10 अप्रैल का आलेख ( अमर उजाला)
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सहारनपुर: वर्ष 1947 के आस-पास जन्में जिन लोगों ने देश की आज़ादी की लड़ाई नहीं देखी थी या जिनको उस वक्त की कोई घटना याद नहीं, वह सब लोग आजकल देश में आज़ादी की दूसरी लड़ाई लड़ी जाती देख सकते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि उस समय देश में गोरी चमड़ी वाले अंग्रेज़ों का राज था और आजकल देश में काली चमड़ी वाले अंग्रेज़ों का राज है। वह भी देश को लूटने-खसोटने के लिये आये थे, यहां का धन समेट कर अपने देश ले जाते थे और ये काले अंग्रेज़ भी देश वासियों को लूट – लूट कर सारा धन विदेशी बैंकों में भेज रहे हैं । उस समय उन गोरी चमड़ी वालों से मुक्ति दिलाने के लिये क्रांति का बीज बोया गया था, गरम दल के क्रांतिकारियों और नरम दल के नेता महात्मा गांधी की अगुआई में देश ने लड़ाई लड़ी थी, और इस बार भी देश को लूट खसोट कर खा रहे इन काले अंग्रेज़ों से मुक्ति के लिये देश की जनता को अन्ना हज़ारे के रूप में एक संत मिल गया है जो उनकी अगुआई करने के लिये तत्पर है। इन भ्रष्ट काले अंग्रेज़ों के शर्मनाक कारनामों से पूरा देश किस बुरी तरह से संत्रस्त है इसका अनुमान इस तथ्य से ही लगाया जा सकता है कि अन्ना हज़ारे व कुछ सौ अन्य सहयोगियों द्वारा जन्तर-मंतर पर आमरण अनशन करने का समाचार देखते ही देखते पूरे देश में जंगल की आग की भांति फैल गया और देश को भ्रष्टाचार से बचाने के लिए नगर-नगर व गांव - देहात की जनता अन्ना हजारे के समर्थन व सहयोग के लिये स्वतःस्फूर्त भाव से सडको पर उतर आई है। व्यापारी, चिकित्सक, उद्यमी, कलाकार, व्यवसायी, छात्र, नौकरी पेशा लोग, महिलायें, पुरुष - हर कोई उत्साह से सराबोर है और इन भ्रष्टाचारियों को, काले अंग्रेज़ों को ठीक से सबक सिखाने के लिये उतावला हो रहा है। सरकार में बैठे हुए इन काले अंग्रेज़ों की हर चन्द कोशिश है कि किसी प्रकार से यह आंदोलन समाप्त हो जाये और उनका काला धंधा बदस्तूर चलता रह सके पर जनता ने भी ठान लिया है कि अभी नहीं तो कभी नहीं ! भ्रष्टाचार के सबसे बड़े संरक्षक के रूप में खुद इस देश के प्रधानमंत्री को देखा जा रहा है। भ्रष्टाचार के विरुद्ध इस लड़ाई में काले अंग्रेज़ों की इस सरकार के मुखिया सरदार मनमोहन सिंह को केवल पांच दिन के भीतर घुटने टेकने पड़ गये - यह देखकर पूरे देश में दीवाली जैसा माहौल दिखाई दे रहा है, इंडिया गेट पर और हर शहर के मुख्य मार्गों पर लोग जुलूस की शक्ल में घूमते दिखाई दे रहे हैं, बधाइयों का आदान प्रदान हो रहा है। हर किसी को कांग्रेस सरकार की इस पराजय को देख कर लंका पर विजय का दृश्य आंखों के सम्मुख कौंध रहा है। वैसे भी क्रिकेट के वर्ल्ड कप में आस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और अंततः श्रीलंका पर विजय के बाद जनता का एड्रेनलिन का स्तर पहले से ही बहुत अधिक बढ़ा हुआ है। आज की अन्ना हज़ारे की इस विजय को वर्ल्ड कप की प्राप्ति से भी कहीं अधिक उत्साह जनक माना जा रहा है। अधिकारियों और सरकार के मंत्रियों के हौंसले पस्त हैं, चेहरों पर हवाइयां उड़ रही हैं।
देश की जनता को अपनी चुनी हुई सरकार को ही नीचा दिखा कर, अपने प्रधानमंत्री को और उनके सहयोगी मंत्रियों को अपमानित होता हुआ देख कर हार्दिक आह्लाद की अनुभूति हो रही हो, इससे बड़ा दुर्दिन कांग्रेस के नेताओं के लिये और कोई नहीं हो सकता था। यह विडंबना ही कही जा सकती है कि जिनसे नायक बन कर देश को नेतृत्व देने की उम्मीद जनता ने लगाई थी, वे जनता को लूटने – खसोटने और काली कमाई से अपना घर भरने वाले, आने वाली सौ पुश्तों का प्रबन्ध करने की इच्छा रखने वाले खलनायक साबित हुए।
जहां तक सहारनपुर नगर का प्रश्न है, यहां पर भी उत्साह का वही माहौल हर ओर दिखाई दे रहा है । अधिकारियों और नेताओं को छोड़ दें तो अपने अपने स्तर पर हर किसी ने इसमें सहभागिता की है। आज व्यापारियों ने घंटाघर चौक पर भ्रष्टाचार का पुतला फूंकते हुए कहाकि देश से भ्रष्टाचार को मिटाना है तो अन्ना हजारे का साथ देना होगा । आर्य जाट समाज कल्याण समिति के सदस्यों ने भी हकीकतनगर धरना स्थल पर धरना देते हुए कहाकि हमे देश के लिए व अपने व अपने बच्चों के भविष्य के लिए लडना होगा तभी हमारा देश तरक्की कर सकता है उन्हाने कहा कि आज के समय में अन्ना जैसे समाज सुधारको की आवश्यकता है और उनका साथ इस मुहिम के लिए देना होगा तभी हमारा भ्रष्टाचार मुक्त का सपना साकार हों सकता है । उधर महामंडलेश्वर बाबा रिजकदास ने भी एक प्रेसवार्ता का आयोजन करके यह ऐलान किया है कि इस लडाई में वह अन्ना हजारे के साथ हैं। उधर आज दीवानी कचहरी में वकीलों ने भी अपने कार्य से विरत रहकर अन्ना हजारे के समर्थन में गेट पर ही धरना दिया और कहा कि जब तक उनकी मांगे नही मानी जाती तो वे उनके साथ है।
शिवसेना ने फूंका शाहिद आफरीदी का पुतला
सहारनपुर
सैनी
शिव सेना के सदस्यों ने आज गांधी पार्क से कोर्ट रोड होते हुए एक प्रर्दशन मार्च किया औी कलैक्टेट तिराहे पर पाकिस्तानी कप्तान का पुतला फूंका । योगेन्द्र सिरोही ने कहाकि शाहीद आफरीदी के भारत के खिलाफ ब्यान देना सही नही है उनहोने कहा कि उन्हे ब्यान देने से बाज आना चाहिए । जहां पहले वे भारत में किस प्रकार ब्यान देकर गये ; लेकिन पाकितस्तान में उन्हाने भारत के खिलाफ ग्यान दिया है शिवसेना इसे किसी सूरत में बर्दाश्त नही करने वाली है अगर उन्होने भारत से माफी नही मांगी तो शिवसेना का आंदोलन जारी रहेगा ।
अधिकारों के सडको पर उतरी महिलाएं
सहारनपुर: (सैनी
अपने अधिकारो की रक्षा के लिए आज हजारों की संख्या में महिलाएं सडको पर उतरी और और मांगों को लेकर एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा ।
महिला अधिकार मंच की अध्यक्ष पुनाता गौतम के नेत्तव में आज हजारों महिलाएं गांधी पार्क में इकटठा हुई और उसके बाद इन्होने घंटाघर होते कोर्ट रोड से कचहरी तक प्रर्दशन किया इसके बाद उन्होने आपनी मांगों के जिला प्रशासन को एक ज्ञापन दिया जिसमें उन्हाने कहाकि आज महिलाओं का उत्पीडन चरम सीमा पर है और मनरेगा में अधिकारियों की मिलीभगत से घोटाला किया जा रहा है जो लोग काम पर भी आते है उनकी उपस्थिति दिखाकर सरकार का मोटा धन हडपा जा रहा है अगर इसी प्रकार गरीबों का धन हडपा जाता रहा तो एक दिन सभी महिलाएं सउको पर होंगी जिस की जिम्मेदारी शासन प्रयासन की होगी ।
कमिश्नर कायार्लय पर किसानों का धरना लगातार जारी
सहारनपुर: (सैनी
कमिश्नर कार्यालय पर बकाया गन्ना मूल्य प चीनी मिलों द्वारा ब्याज दिये जाने और बिजली के खंभों का किसानों को उचित मुआवजा दिये जाने की मांग को लेकर धरना जारी है किसान नेता व फारमर्स फोरम के अध्यक्ष योगेश दहिया का कहना है जब तक किसानों को उचित मुआवजा नही मिलता है तो उनका धरना जारी रहेगा इससे पहले भूमि अध्याप्ति अधिकारी व गन्ना अधिकारी उनकी कई दौर की वार्ता हो चुकी है लेनिक कोई समाधान नही हो पा रहा है ये तो भूमि अध्याप्ति अधिकारी भी मानते है कि मुआवजा किसानों के लिए कम है लेकिन उनका कहना है कि वे अपने अधिकरों से बंधे नियमानुसार कार्य करना उनका कर्तव्य है । किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगे नही मानी जाती तो धरना देते रहेंगे ।
उक्त कार्यक्रमों के चित्रों के लिये कृपया हमारी फोटो गैलरी देखें ।
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यदि सरकार के लिये प्रजा बच्चों के समकक्ष है तो जो सिद्धान्त बच्चों के लिये सही है वह प्रजा के लिये भी सही माना जाना चाहिये। बच्चों के सही लालन-पालन के बारे में जब बात की जाती है तो एक सिद्धान्त बार – बार दोहराया जाता है कि बच्चा कुछ मांगे और उसकी वह मांग जायज़ हो तो उस मांग को एक बार में ही पूरा कर दिया जाना चाहिये और यदि वह मांग नाजायज़ हो तो बच्चे के रोने-धोने, धमकी देने आदि से डरे बिना उसे स्पष्ट कर देना चाहिये कि यह मांग नाजायज़ है अतः पूरी नहीं हो सकती।
यही आदर्श स्थिति सरकार और जनता के बीच में भी होनी चाहिये। जनता के बीच में से कहीं से कोई मांग उठे, कोई प्रार्थना या अपील की जाये तो सरकार को उसे फौरन गंभीरता से सुनना चाहिये और यदि वह मांग, प्रार्थना या अपील उचित व स्वीकार करने योग्य है तो उसे तुरन्त मान लिया जाना चाहिये और यदि अनुचित है तो किसी भी प्रकार के आन्दोलन, बल-प्रदर्शन, हड़ताल, घेराव, धरने से बिना डरे सरकार द्वारा स्पष्ट कर दिया जाना चाहिये कि मांग किसी भी स्थिति में पूरी नहीं होगी।
जिस परिवार व समाज में इस प्रकार की संवेदनशील व्यवस्था हो वहां बच्चा ही नहीं, जनता भी बड़ी जल्दी समझ जाती है कि गलत बात को लेकर जिद करने से कोई लाभ नहीं होता क्योंकि वह कभी मानी नहीं जाती है। पर हमारे देश में आज़ादी के बाद से कांग्रेस सरकारों ने यह शर्मनाक परम्परा विकसित की है कि जनता की किसी भी जायज़ मांग को भी वर्षों तक लटकाये रहो, आंदोलन होने दो, और जब मामला बिलकुल सर से ऊपर निकलने लगे तो एहसान पटकते हुए उस मांग को पूरा कर दो और उसका राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास करो। हमारी कांग्रेस सरकारें जनता को यह आभास देती रही हैं कि मांग कितनी भी जायज़ हो, बिना आंदोलन या हड़ताल के पूरी नहीं की जायेगी और आंदोलन करने, दबाव डालने पर हर जायज़ - नाजायज़ मांग को भी पूरा कराया जा सकता है। स्वाभाविकतः ऐसे में हमारे देश में हर रोज़ कहीं न कहीं धरने – प्रदर्शन हड़ताल होते ही रहते हैं। कभी सड़कों पर जाम लगाये जाते हैं, कभी रेल की पटरियों पर बोरिया – बिस्तर बिछा कर लेटा जाता है, अधिकारियों की घेरा बंदी की जाती हैं, कभी फैक्टरियों और मिलों में, सार्वजनिक वाहनों व भवनों में तोड़-फोड़ की जाती है। किसी को भी यह पता लगाना असंभव सा हो जाता है कि कौन सी मांग मांगे जाने लायक है और कौन सी नाजायज़ है। सबको बस इतना पता होता है कि जिसमें सरकार को झुकाने लायक दम-खम है, वह झुका सकता है। मांग गलत है या सही है इसके कतई कोई महत्व नहीं है।
सरकार के स्तर पर जिस संवेदन हीनता का परिचय दिया जाता रहा है, उसी कुशिक्षा को हमारे देश के नियोक्ताओं ने भी जस-का तस ग्रहण कर लिया है। भारत के सरकारी, गैर – सरकारी संस्थानों के कर्मचारियों को अक्सर जापान का उदाहरण देते हुए शिक्षा दी जाती है कि वहां कभी भी हड़ताल के कारण काम बन्द नहीं किया जाता। काली पट्टी बांह पर बांध कर कर्मचारी काम करें तो इसका अर्थ यह माना जाता है कि उनकी कुछ मांगें हैं जिन पर सुनवाई अपेक्षित है। जापान में यदि जूता फैक्टरी में हड़ताल की नौबत आये तो कर्मचारी एक ही पैर के जूते बनाते चले जाते हैं ताकि कंपनी दबाव अनुभव करे पर फैक्टरी में काम बन्द नहीं किया जाता है। पर जापान का उदाहरण देने से पहले क्या यह विचारणीय नहीं है कि वहां काली पट्टी बंधी देखते ही लेबर इंस्पेक्टर पन्द्रह मिनट में सुनवाई हेतु हाजिर हो जाता है और कर्मचारियों की मांग पर पूरी सदाशयता के साथ विचार विमर्श होता है ! भारत में जैसी संवेदन हीन व्यवस्था है यहां तो सारी ज़िन्दगी काली पट्टी बांधे रहो, तो भी सुनवाई नहीं होने वाली है।
सरकारी स्तर पर पुष्पित – पल्लवित हुई इसी संवेदनहीनता की यह पराकाष्ठा ही तो थी कि हमारे प्रधानमंत्री स. मनमोहन सिंह सामान्य शिष्टाचार को पूरी तरह से तिलांजलि देते हुए एक या दो नहीं, बल्कि अन्ना हज़ारे व सिविक सोसायटी द्वारा लिखे गये छः पत्रों को हज़म कर गये और पत्र प्राप्ति की सूचना देना भी गवारा नहीं किया, उस पर कार्यवाही करना तो दूर की बात है। जिन लोगों ने इन पत्रों पर हस्ताक्षर किये थे, वे देश के अति सम्मानित नागरिक हैं। यदि स. मनमोहन सिंह का प्रधानमंत्री के रूप में यह निकृष्ट रवैया है कि देश के कुछ विशिष्ट नागरिक उनको छः पत्र लिखें और वह उनको इस अंदाज़ में लें कि “भौंकने दो, कुत्ते तो भौंकते ही रहते हैं !” तो आम जनता की किस स्तर पर और कहां सुनवाई होगी, यह कल्पना ही दुष्कर है। अन्ना हज़ारे व उनके साथियों द्वारा देश के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, कानून मंत्री, सत्तारूढ़ पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपराष्ट्रपति, लोकसभा स्पीकर, नेता प्रतिपक्ष आदि से संपर्क किया गया या करने की चेष्टा की गई और जब कोई सार्थक परिणाम सामने आता दिखाई नहीं दिया तो अन्ततः अन्ना हज़ारे ने जन्तर मन्तर पर आमरण अनशन करने की ठान ली। अनशन की खबर सुनते ही सरकार के मुखिया और मंत्रियों के पांवों तले जमीन खिसक गई। चिन्ता यह नहीं थी कि आमरण अनशन से अन्ना हज़ारे के जीवन को खतरा है। (उसकी तो सरकार को कोई चिन्ता नहीं थी – अन्ना यदि कल के मरते आज मर जायें, मनमोहन सिंह की बला से !) चिन्ता थी तो ये कि यह अनशन एक जन-आंदोलन की शक्ल ले लेगा तो पांच राज्यों में होने वाले चुनावों में कांग्रेस की लुटिया पूरी तरह से डूब जायेगी। इस डिसास्टर कंट्रोल के लिये सरकार द्वारा अपने बड़बोले मंत्री कपिल सिब्बल को जिम्मेदारी दी गई कि अन्ना को किसी तरह से पटाओ और अनशन समाप्त कराओ ।
देश की जनता का जहां तक संबंध है, वह एक के बाद एक खुलते घोटालों और उसमें शामिल भारी भरकम राशि के बारे में जान कर स्तब्ध है और इस भ्रष्ट व्यवस्था से मुक्ति चाहती है। नेताओं और अधिकारियों की विश्वसनीयता अब शून्य पर नहीं, बल्कि नकारात्मक स्तर पर है। खुद सरकार के मुखिया ईमानदार और शरीफ कहे जाने वाले प्रधानमंत्री स. मनमोहन सिंह कहें कि दोपहर का एक बजा है तो देश की जनता अपनी घड़ी देख कर पुष्टि अवश्य करना चाहेगी कि वास्तव में एक ही बजा है या नहीं । विश्वास का यह संकट देश की सबसे बड़ी विडंबना बन चुका है और साथ ही खतरा भी । यदि जनता अपने नेतृत्व के प्रति ही विश्वास खो चुकी है तो इससे बड़ी विडंबना और कुछ नहीं हो सकती।
हमारी सरकार अब अन्ना हज़ारे द्वारा आरंभ किये गये इस अनशन से और उससे भी बढ़ कर, देश के कोने – कोने से जनता जिस प्रकार अन्ना द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध छेड़ी गई इस मुहिम के साथ लाखों – करोड़ों की संख्या में तेजी से जुड़ती चली जा रही है उसे देख कर बहुत सारे मंत्रियों और अधिकारियों की पैंट ढीली होने लगी हैं तो इसमें अस्वाभाविक कुछ भी नहीं है। देश की स्वतंत्रता से लेकर आज तक ये लोग कायदे कानून को धता बताते हुए देश की छाती पर मूंग दलते चले आरहे हैं। कहने को कानून की निगाह में छोटा- बड़ा, गरीब – अमीर सब बराबर है, पर व्यवहार में इससे बिल्कुल उलट होता चला आया है। जो जितने बड़े पद पर आसीन है, कानून उतना ही अधिक उसकी मुठ्ठी में है। देश में ऐसी एक भी संस्था नहीं है जो इन सफेदपोश भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे अपराधियों को उनके अपराधों की जांच करने व उनको सजा दे सकने में सक्षम हो। अन्ना हज़ारे की मांग भी यही है कि 1968 से ठंडे बस्ते में डाला जा रहा लोकपाल विधेयक न सिर्फ तुरन्त प्रभावी किया जाये बल्कि उसमें आवश्यक संशोधन करते हुए उसे इतना शक्तिशाली बनाया जाये कि लोकपाल प्रधानमंत्री, मंत्री व सभी सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध बिना किसी भय या दबाव के जांच करने में व सजा दे सकने में सक्षम हो। यह मांग जनता को भी भा रही है और देश के कोने कोने से इस मांग को समर्थन दिया जा रहा है।
यदि स. मनमोहन सिंह की सरकार ने सिविक सोसायटी और अन्ना हज़ारे द्वारा पिछले वर्ष प्रधानमंत्री को विचारार्थ भेजे गये जन-लोकपाल मसौदे को सम्मान की निगाहों से देखा होता और उनको विचार-विमर्श हेतु आदर सहित बुलाया होता तो इससे सरकार की सदाशयता प्रकट होती, भ्रष्टाचार से लड़ने की उनकी इच्छा भी जाहिर होती । पर मनमोहन सिंह ने ऐसा न करते हुए अपराधियों और भ्रष्टाचारियों को बचाने व उनका साथ देने को अधिक महत्व दिया और अन्ना हज़ारे द्वारा उनको प्रेषित किये गये जन-लोकपाल विधेयक को रद्दी की टोकरी के हवाले कर दिया। आज सरदार मनमोहन सिंह के चेहरे पर कालिख पुत रही है, उनको भ्रष्टाचारियों का सबसे बड़ा संरक्षक माना जारहा है तो इसके लिये और कोई नहीं वह स्वयं जिम्मेदार हैं। उनके अन्दर इतना आत्मबल ही नहीं है कि – “ये ले अपनी लकुटि कमरिया, तूने बहुत ही नाच नचायो” कह कर भ्रष्टाचारियों से पल्ला झाड़ सकें ।“ अब अगर अन्ना के अनशन के और उनके साथ जुड़ रही भारत की जनता के कोप के भय से वह उसी जन लोकपाल विधेयक को रद्दी की टोकरी में से वापिस निकाल कर, साफ – सूफ करके उस पर अपने हस्ताक्षर करने के लिये मज़बूर हो रहे हैं तो यही कहा जा सकता है कि १०० जूते भी खा लिये और १०० प्याज भी खानी पड़ गईं । काश समय पर ही समझदारी दिखाई होती ।
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कृपया विभिन्न कार्यक्रमों / आयोजनों के चित्रों हेतु हमारी फोटो गैलरी में पधारें ।
बचत जागरुकता अभियान
कारवां सामाजिक संस्था द्वारा बचत जागरुकता अभियान कार्यक्रम का आयोजन करके एम.आर. एस. मैमोरियल सीनियर सैकेंडरी स्कूल, गंगोह रोड के सीनियर छात्रों को बचत के महत्व से परिचित कराया गया। इस कार्यक्रम में अरुण कुमार श्रीवास्तव, डी.डी.एम. नाबार्ड, एफ.सी. सिंगला, पंजाब नेशनल बैंक के अग्रणी बैंक प्रबंधक, अरुणा सैनी, निदेशक कारवां संस्था, जावेद खान सरोहा, बिशम्भर नाथ बजाज ने छात्रों को प्रभावी ढंग से बचत का महत्व समझाया। प्रबंधक विनीत सैनी, निदेशक सुनीता, प्रधानाचार्य सोमनाथ आदि उपस्थित रहे।
भारतीय कश्यप विकास मंच द्वारा पदाधिकारियों का चुनाव
भारतीय कश्यप विकास मंच द्वारा मुख्य अतिथि एवं बसपा नेता मांगे राम कश्यप की उपस्थिति में एक बैठक का आयोजन किया गया व उसमें सहारनपुर देहात (ग्यान सिंह कश्यप;), सहारनपुर नगर (विश्वास सिंह कश्यप;), देवबन्द (बिरजपाल कश्यप;), नकुड़ (रूपराम कश्यप;), रामपुर मनिहारान (कृष्ण कश्यप
व बेहट तहसील के लिये राजू कश्यप की विधान सभा अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति की गई। इस अवसर पर बोलते हुए मुख्य अतिथि मांगे राम कश्यप ने कहा कि दबे, कुचले, शोषित, पीड़ित, निर्धन, गरीब लोगों के हित में हमारी नेता बहिन मायावती जी ने जो काम किये हैं, उनके सद्प्रयासों के परिणाम स्वरूप ही कश्यप समाज एक मंच पर मजबूती से खड़ा दिखाई दे रहा है।
बैठक में जिला स्तरीय महासम्मेलन व मार्च के अंत में महर्षि कश्यप की जयन्ती मनाने के निर्णय भी लिये गये।
समाजवादी पार्टी द्वारा बसपा शासन की तीखी आलोचना
समाजवादी पार्टी के नेताओं ने मानकमऊ में इसरार प्रमुख विधान सभा प्रभारी का स्वागत करते हुए जहां एक ओर बसपा की नीतियों की कटु आलोचना करते हुए उसका मुंहतोड़ जवाब देने का ऐलान किया वहीं सहारनपुर गांधी पार्क में ट्रैक्टर ट्राली, झोटा बुग्घी, रिक्शाचालक, किसान, मज़दूर और नौजवानों का आह्वान किया कि वह भारी संख्या में पहुंच कर अपनी संगठित शक्ति का परिचय दें। बैठक में अब्दुल मलिक ने इसरार को मज़बूत और जिताऊ तथा टिकाऊ काम करने वाला भरोसेमंद साथी बताते हुए सहारनपुर देहात के लिये उसे प्रत्याशी बनाने का समर्थन किया और बताया कि इस बारे में उनकी काजी रशीद मसूद से भी बात हुई है जिन्होने जल्दी फैसला कराने का वचन दिया है। बैठक की अध्यक्षता लियाकत अली आई.टी.सी. ने की और संचालन ज़ीशान मलिक ने किया।
एक अन्य कार्यक्रम में पंजाबी महासम्मेलन को सम्बोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के नेताओं ने अपनी पार्टी की नीतियों का व उस शासनकाल के दौरान किये गये विकास कार्यों का बखान किया साथ ही, बसपा शासन को कोसते हुए उसे गरीब विरोधी सरकार बताया। विधायक इमरान मसूद ने कहा कि आज पूरा पंजाबी समाज समाजवादी पार्टी के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि बसपा अपनी गलत नीतियों के चलते डूबने वाला जहाज है। कार्यक्रम में सभासद सुशील जैन ने भी संबोधित किया।
रिपब्लिकन पार्टी द्वारा राज्यपाल को ज्ञापन
प्रदेश में निरंतर बढ़ रहे अपराधों, विशेषकर महिलाओं और दलितों के विरुद्ध बढ़ रहे अपराधों के लिए आक्रोश व्यक्त करते हुए रिपब्लिकन पार्टी औफ इंडिया ने जिलाधिकारी, सहारनपुर के माध्यम से एक ज्ञापन आज महामहिम राज्यपाल को प्रेषित किया जिसमें बसपा सरकार के कुछ विधायकों और मंत्रियों के ही ऐसे जघन्य अपराधों में लिप्त होने व उनके विरुद्ध कोई कार्यवाही न होने के लिये सरकार की आलोचना की गई है। इसके अतिरिक्त बेरोजगारी, अवरुद्ध हो रहे विकास कार्य, बिजली कटौती, बी.पी.एल. परिवारों के लिये रियायती राशन आदि की भी मांग इस ज्ञापन में की गई है। मुख्यमंत्री के हवाई दौरों पर कटाक्ष करते हुए इन दौरों को आम जनता के लिये सिर्फ परेशान करने वाली नौटंकी बताया गया है और कहा गया है कि इन तथाकथित विकास कार्यों की समीक्षा के दौरों में कर्फ्यू जैसी स्थिति पैदा करके आम जनता को उसके अपने घरों में ही बन्दी बना दिया जाता है, किसी को भी मुख्यमंत्री से मिलने नहीं दिया जाता है। ज्ञापन में ऐसे दौरे के दौरान बीमारों को अस्पताल न पहुंचने देने और चौराहे पर रोक दी गई एंबुलेंस में ही तड़प तड़प कर मर जाने देने के लिये मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा गया कि मुख्यमंत्री विकास के लिये नहीं, गरीबों की हत्या के लिये ऐसे दौरे किया करती हैं । नगीना सिंह कर्णवाल, एडवोकेट, जिलाध्यक्ष द्वारा हस्ताक्षरित इस ज्ञापन में उत्तर प्रदेश सरकार को अविलंब बरखास्त करने की मांग की गई है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली की सफलता हेतु ग्राम प्रधानों की जागरुकता आवश्यक
जनमंच सभागार में जिलापूर्ति अधिकारी डी.सी. श्रीवास्तव ने दो-दिवसीय गोष्ठी में ग्राम प्रधानों को जागरुक करने की आवश्यकता पर बल दिया और इस जागरुकता के बल पर राशन प्रणाली को सुधारने की बात कही। गोष्ठी के दूसरे दिन उन्होंने कुछ स्थानों पर राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता के अभाव की बात को स्वीकार करते हुए इसके लिये विभाग को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि ग्राम प्रधान यदि जागरुक होंगे तो यह सब गड़बड़ियों को सरलता से जनता द्वारा ही रोका जा सकेगा।
रेलमंत्री ममता बैनर्जी का पुतला फूंका
पश्चिम बंगाल के चुनावों के मद्देनज़र तैयार किये गये रेल बजट में उत्तर प्रदेश को सुविधाओं से वंचित रखने का आरोप लगाते हुए रेलमंत्री ममता बैनर्जी का पुतला फूंकते हुए व्यापारियों ने बजट में सहारनपुर की उपेक्षा की जोरदार निंदा की। व्यापार मंडल से जुड़े व्यापारियों ने घंटाघर चौक पर एकत्र होकर रेलमंत्री के विरोध में नारेबारी की और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को ठेंगा दिखाने वाली ममता बैनर्जी का पुतला फूंक कर रोष प्रकट किया।
मेयर चुनाव सीधे कराने हेतु राज्यपाल को ज्ञापन
उत्तरी भारत उद्योग व्यापार मंडल (रजि.) की ओर से उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को ज्ञापन भेज कर मांग की गई है कि बसपा शासन की लोकतंत्र विरोधी कोशिशों को विफल करते हुए स्थानीय निकाय के मेयर व अध्यक्ष पद हेतु जनता के द्वारा सीधे चुनाव कराये जाने चाहियें जैसा कि पहले से होता चला आ रहा है। अजीम मलिक, अलताफ चौधरी, डा. हर्षवर्द्धन शर्मा आदि द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में मांग की गई है कि लोकतंत्र का गला घोंटने की मुख्यमंत्री की कोशिशों को विफल किया जाये क्योंकि इससे न केवल चुनाव महंगे हो जायेंगे बल्कि राजनीतिक भ्रष्टाचार, सभासदों की खरीद फरोख्त का बाज़ार गर्म हो जायेगा । इस ज्ञापन में उत्तर प्रदेश की सरकार को अधिनायक वादी सरकार बताते हुए इसे भंग करने की सिफारिश करने हेतु राज्यपाल से अनुरोध भी किया गया है।
सहारनपुर क्राइम कैपिटल बन रहा है : व्यापार मंडल
पिछले पन्द्रह दिनों के भीतर लूटपाट की आठ घटनाओं के बाद भी अपराधियों के बेखौफ घूमने को लेकर सहारनपुर उद्योग व्यापार मंडल (रजि.) की ओर से आक्रोश व्यक्त किया गया और पुलिस विभाग के नाकारापन का इलाज तुरंत करने की मांग की गई। युनीटैक के कैशियर से लूट, ओरियंटल बैंक से बाहर निकलते दंपत्ति से लूट, बाइकर्स गैंग द्वारा लगभग हर रोज कहीं न कहीं चेन खींचने के अपराधों आदि से उद्वेलित व्यापारियों ने पुलिस प्रशासन को अपनी अकर्मण्यता त्याग कर अपराधों पर अंकुश लगाने की जोर दार मांग की ।
हैल्पलाइन पत्रिका का व्यापार मंडल द्वारा विमोचन
सहारनपुर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल (रजि.) के पदाधिकारियों ने अपने सदस्य अनिल कश्यप द्वारा प्रकाशित की गई हैल्पलाइन पत्रिका का विमोचन करते हुए इस पत्रिका को जनता के लिये बहुत उपयोगी बताया जिसमें नगर के सभी अधिकारी, अस्पताल, थाने, गैस एजेंसी, कालेज, स्कूल, रेलवे स्टेशन आदि के फोन नंबर दिये गये हैं। इसमें रिश्ते, ज्ञान व मनोरंजन से भरपूर जानकारी देने का भी प्रयास रहेगा, ऐसा अनिल कश्यप ने बताया।
होज़ियरी व रेडीमेड वस्त्रों पर उत्पादन शुल्क वृद्धि के प्रस्ताव का जोरदार विरोध
होजियरी व रेडीमेड वस्त्रों के उत्पादन पर हाल ही के बजट में १० प्रतिशत उत्पादन शुल्क लगाने के विरोध में पूरे जिले में रेडीमेड व होज़ियरी उत्पादन कर रही औद्योगिक इकाइयां बन्द रहीं व लघु उद्योग पर कुठाराघात करने वाले इस बजट प्रस्ताव के विरोध में जिलाधिकारी सहारनपुर के माध्यम से एक ज्ञापन भी सौंपा गया। व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष के.एल. ठक्कर व महामंत्री विवेक मनोचा ने भारी संख्या में एकत्र हुए उद्यमियों व व्यापारियों की ओर से कहा कि सरकार अंग्रेज़ों की नीतियों पर चलते हुए अपने ही देश के उद्योगों को समाप्त करके विदेशी व्यापारियों को प्रोत्साहन देने का आत्मघाती कार्य कर रही है। होज़ियरी उद्योग के अस्तित्व की रक्षा के लिये गुहार करते हुए इस बजट प्रस्ताव को तुरन्त वापिस लेने की व्यापारियों व उद्यमियों द्वारा मांग की गई ।
होज़ियरी उद्योग के अध्यक्ष सतपाल कांबोज, महामंत्री घनश्याम माहेश्वरी, महानगर संयोजक सुरेन्द्र मोहन चावला ने सरकार को आगाह किया कि यदि यह बेतुका फैसला वापिस न लिया गया तो पूरे भारतवर्ष में रेडीमेड व होज़ियरी उत्पादन पर ताला लटका दिया जायेगा और लाखों लोगों के बेरोजगार होने की संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार की ही होगी।
ट्यूबवैल टेक्नीकल इंप्लाइज़ एसोसियेशन द्वारा धरना
ट्यूबवैल टेक्नीकल इंप्लाइज़ एसोसियेशन के सदस्यों द्वारा अपनी मांगों की ओर ध्यानाकर्षित करते हुए जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया गया व १७ सूत्रीय मांगों के पूरा होने तक संघर्ष जारी रखने व जरूरत पड़ने पर हड़ताल पर जाने की चेतावनी सरकार को दी गई। धरने को श्रद्धानंद शर्मा, रमेश चन्द्र सैनी, अशोक कुमार, विजय पाल आदि ने संबोधित किया।
स्कूल कालेजों में कार्यक्रम
कैरियर कार्नर इकाई द्वारा सेमिनार
स्थानीय मुन्नालाल गर्ल्स कालिज में कैरियर कार्नर इकाई में "प्रबंधन पाठ्यक्रमों में रोजगार की संभावनायें" विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया जिसमें सरस्वती प्रबंधन एवं तकनीकी संस्थान (SIMT) के निदेशक रंजन गुप्ता ने मुख्य वक्ता के रूप में छात्राओं को प्रबंधन पाठ्यक्रमों की उपयोगिता बताते हुए कहा कि यह एक संस्कार है जो हमें हमारे जीवन का प्रबंधन सिखाता है, समय का अधिकतम उपयोग करना सिखाता है जिसके चलते हमें २४ घंटे भी ४८ घंटे अनुभव होने लगते हैं। इस आयोजन में TCIL Saharanpur के केन्द्र प्रबन्धक संजय गुप्ता तथा भावना गुप्ता, शैफाली आत्रेय, शिवांगी गुप्ता भी रहे। डा. रत्ना त्रिवेदी, डा. सीमा सिंह, डा. निर्मल डर्मा, मधु रानी आदि का विशेष सहयोग रहा। अन्त में कैरियर कार्नर प्रभारी श्रीमती सुमेधा नीरज ने सभी छात्राओं को महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने हेतु वक्ताओं का धन्यवाद किया।
छात्राओं हेतु विदाई समारोह का आयोजन
मुन्नालाल कालिज में ही हिन्दी विभाग की छात्राओं द्वारा अपनी सीनियर छात्राओं को भावभीनी विदाई देते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। रोली - तिलक से छात्राओं का स्वागत करते हुए स्वागत गीत, कविताएं, ग़ज़ल, नृत्य आदि प्रस्तुतियों द्वारा कार्यक्रम को मनोरंजक स्वरूप प्रदान किया गया। कालेज की प्राचार्या श्रीमती वीणा जैन ने छात्राओं को आशीर्वाद प्रदान किया व अधिकतम उपस्थिति दर्ज करने वाली छात्राओं को पुरस्कृत भी किया गया। समारोह में डा. सुधा कौल, डा. जया, डा. निर्मल शर्मा, कु. शिखा कपूर आदि प्रवक्ता भी उपस्थित रहीं। कु. ज्योति शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया।
शिवरात्रि के पावन पर्व पर शहर में रुद्राभिषेक कार्यक्रम व शोभायात्रा
शिवरात्रि के पावन पर्व पर सहारनपुर में विभिन्न मंदिरों में - विशेषकर श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर, श्री बागेश्वर मंदिर, श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर व अन्य सभी मंदिरों में भगवान शिव की पूजा व अभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं का दिन भर तांता लगा रहा। इस अवसर पर एक शोभायात्रा का आयोजन किया गया जिसका उद्घाटन सिटी मजिस्ट्रेट हरिश्चन्द्रा ने किया। उपस्थित समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म से मानसिक शान्ति मिलती है। पूर्व कांग्रेस विधायक व समाजसेवी सुरेन्द्र कपिल ने फीता काट कर शुभारंभ किया और सपा नेता विनय जिंदल ने ज्योति प्रज्ज्वलित की।
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत गठित राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के जनपद सहारनपुर के पी.आर.ओ. व उत्तर प्रदेश सफाई मज़दूर संघ के जिला महामंत्री धीरज आज़ाद ने नगर आयुक्त सहारनपुर को सफाई कर्मचारियों की समस्याओं के संबंध में एक ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि सफाई कर्मचारियों के वेतन को शासन के आदेशों के अनुरूप प्रदान किया जाये, एरियर का भुगतान किया जाये, गर्म व ठंडी वर्दी का वितरण शीघ्र कराया जाये जो कि वर्ष २००७-०८ से लंबित चली आरही है। साथ ही, रिक्त पदों पर पदोन्नति के माध्यम से नियुक्तियां करने समेत अन्य समस्याओं की ओर भी ध्यानाकर्षित किया गया है।
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Saharanpur (21 Feb) : Today’s diary brings for you a myriad of activities taking place in the city which spanned from music competition to legal awareness camp, and from Farewell of students at Gyankalash to conclusion of one-month long stitching training camp for the girls. Today’s report also brings some pictures of Belt competition organized by Bruce Lee Martial Arts Academy on one hand and biting criticism of U.P. Chief Minister Mayawati by the SC/ST wing of City Congress Party activists on the other.
MUSIC ALBUM RELEASED BY SUR SANGAM
Can you think of a theft of something from the possession of someone where the victim of theft feels honoured and indebted to the thief? Lord Krishna used to steal makhan from gopi’s houses in His childhood and those gopis who were not cheated of their makhan by Lord Krishna felt cheated themselves. Some people steal heart of the people with their superb stage performances while some Hindi music directors have always been charged of stealing the musical compositions from English movies.
Well, cutting short the preface, yesterday Hariom Ganpati Sahastrabuddhe didn’t know the depth of his indebtedness towards his friends who stole his poems and songs to compose, sing and record them and present to him on his birthday in the form of a CD ! The audio album – titled as Geet Tumhare Main Gaaunga ! गीत तुम्हारे मैं गाउंगा carries six songs, written by Hari Om Ganpati Sahastrabuddhe. Music has been provided by Vivek Aryan under the direction of Neelam Agrawal. Rakesh Goyal, Neelam Agrawal, Khyati Gulati and Prashant have given their voice to these songs. The first track of the CD, a devotional song “जय – जय – जय हे वीणा पाणि” was used by Phalguni Bhardwaj, the wonder girl of Saharanpur for her dance performance by way of Saraswati Vandana at the commencement of the function.
For most of the audience, the release of CD was an unexpected but welcome element of the function organized by Sur Sangam since the program was supposed to be a singing competition wherein participants, categorized in A, B and C age groups presented their singing performance. The panel of jury consisted of Anil Sharma, Sandhya Sharma, Anuj Jain, Javed Khan Saroha, Vanya Narula, Sanjeev Jhingran and Navneet Kumar. Shah Faisal, Ankit Sharma and Bilal Ahmed were adjudged as the best performers and were awarded first prizes in their A, B and C groups respectively whereas occupants of the second position were Shreyas Bhardwaj, Meharban Malik and Naseem Usmani in their respective categories. Shubham Kumar of A group, Vidhi Malik and Kushagra Sharma of B group and Bhawna Bhatt of C group held 3rd positions. Special prizes were given to Aditya Arora (A Group), Usha Chanchal (B group) and Rais Ansari (C group).
The star attraction of the program, however, were the juries’ own performances. Vanya Narula’s (आओ हुज़ूर तुम को सितारों में ले चलूं ! ), Navneet Verma’s (मेरे दिल ने तड़प के जब नाम तेरा पुकारा;), Sanjeev Jhingran’s (मोरा पिया बहुरुपिया;), Sandhya Sharma’s (मेरे मौला
served to elevate the status of the program to new heights. The chorus song (जीना इसी का नाम है
by Sur Sangam artists (Neelam Agrawal, Shachi, Neha, Sandeep, Khyati also drew appreciation.
Special Guests of the function were Sh. Jagdish Prasad Dhaundhiyal, Sh. Rajiv Agrawal, Sh. A.N. Singh (Dy. Jailor), and Sh. Harish Malik while Dr. Deepak Bansal, Ranjan Gupta, Sanjay Mittal & Harish Arora (IIMS), Sushant Singhal (Editor of thesaharanpur.com), Sushil Naaz were among the other guests. The twin anchors of the program Javed Khan Saroha and Sandeep Sharma were also very well received by the audience. Sandeep Sharma with his trade mark comic style was successful in keeping the public amused.
FAREWELL AT GYANKALASH INTL SCHOOL
Dr. Santosh Sirohi, Principal, GIS offered her best wishes to the senior most class of her school immediately on the last day of their classes before the Board exams. She hoped that the students would make their parents, school and the society proud and would come out with flying colours in the coming exams. The students, on their part, organized a cultural program on the occasion, sang and danced. They also remembered their days in the school with mixed emotions and thanked the Principal Dr. Sirohi and the teachers for the excellent learning imparted by them.
STITCHING TRAINING WORKSHOP CONCLUDED
Jagritiman Society of Saharanpur today gave away certificates to the 217 girls who successfully completed one-month long stitching training workshop offered to them. Those who performed extra-ordinarily during the training period and gave good results were felicitated also. The certificates were given away by District Horticulture Officer R.K. Saxena, in charge of Company Bagh, Saharanpur.
Addressing the trainees and other guests present on the occasion, Mr. Manish Kumar, BDO appreciated this exercise of women empowerment and said that in most of the cases where women are being subjected to atrocities, their financial dependence on others is found to be their main weakness. Even the semi-literate or illiterate women can start earning if they have gained sufficient expertise in stitching as a worker or even a self-employed person.
The girls, expressed their heart-felt gratitude for the opportunity provided to them by Jagritiman group and hoped that with the renewed feeling of self-confidence will propel them through favourable or adverse circumstances in their life.
Sriram Verma – the General Secretary said that the success has been due to hard work by all members of the team and thanked Kishor Kumar, Ashok Malik, Pramod Sisodia, Jaqar Khan, Suman, Dharmpal, Sunil Kumar, Usha, Noorjahan.
Parallel to it, Iqra Social Welfare Society also concluded its 2-months long workshops for providing stitching and beautician training to 20 girls. Chief Guest Iqra Rehman congratulated the trainee girls and also thanked Aleena and Mahvish for serving as trainers for these girls. Asma, Samreen, Shireen, Hina, Huma, Tabassum, Bushra, Farheen, Farhana, Rarzana, Saira, Nurgis, Rubina, Khushhali, Khurshida were present in the function.
CM MAYAWATI SEVERELY CRITICISED BY SC ST WING OF CITY CONGRESS, SAHARANUR
Ankit Jatav, City President of Shahar Congress Committee (SC/ST Wing) lambasted on CM Mayawati for her misrule in which Dalits are the biggest sufferers. She is masquerading as messiah of Dalit community whereas her officers converted a Dalit farmer Sukhram into Dukhiram by taking away his farm forcibly to make helipad during her short visit to Saharanpur. Ankit Jatav, talking to the press ridiculed BSP Supremo and demanded enough compensation for Sukhram from her so that he would at least be able to feed his family after his crop having been ruined by the police officers of Saharanpur.
Charging BSP Supremo of throwing away hard earned money of people on erecting her statues and making parks, Ankit Jatav commented that people can be prosperous by spreading greenery and not by painting the state in blue colour. He said that it would be enough if she manages U.P. well before dreaming of becoming the Prime Minister of the country.
MARTIAL ART COMPETITION EQUIPS YOUTHS WITH COVETED BLACK BELTS
Bruce Lee Martial Art Academy Grand Master Nand Kishor today supervised a Judo competition for belts today in which belts of different colours were awarded to the participants on the basis of their performance in the competiton. Bhupendra of Halalpur, Kaku of village Beri, Suresh Bhardwaj of Maujampura, Kamaljeet of Mahipura were among the winners of most prestigious Black Belts. Shreshth Garg, Sourabh Garg got Red Belts whereas Alok and Sonu got Brown Belts. Besides them, Jatin, Rohit Singh, Aditya Kishor, Pooja, Ekta, Amit, Rahul also got yellow / orange belts. Grand Master Nand Kishor was all praise of these trainees who in shivering cold attended the classes early in the morning while the city was still sleeping under heavy quilts. Underlining the importance of this martial art, he said that these students have taken a vow to serve the helpless by lending support to those who can’t defend themselves. Smt. Rita Vera, Janki Devi, Rajiv Kumar, Monu Kumar, Sandeep Kashyap, Monika Kumari, Deepti, Sandeep Khatri, Mahendra etc. were present to watch the action packed performance of martial art of the participants.
अपने वैधानिक अधिकारों व कर्त्तव्यों की जानकारी अत्यावश्यक
सहारनपुर (20 फरवरी
: “कानून की जानकारी न होना बचाव हेतु दलील के रूप में मान्य नहीं है, अतः हर नागरिक को अपने वैधानिक व संवैधानिक दायित्वों, कर्त्तव्यों व अधिकारों की जानकारी होना आवश्यक है ताकि हम न तो दूसरों के अधिकारों का अतिक्रमण करें और न ही अपने अधिकारों का अतिक्रमण होने दें।“ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला जज मोहम्मद ताहिर ने दीपांशु कालिज आफ ला द्वारा आयोजित जिला विधिक साक्षरता शिविर में बोलते हुए अपने उद्बोधन में आगे विस्तार से बताया कि भारत में सम्राट विक्रमादित्य न्यायप्रियता के लिये आज भी जाने जाते हैं। वह अपने सिंहासन पर बैठ कर केवल न्याय और सत्य का ही पक्ष लेते थे। बाद में देश में विकेन्द्रीकृत शासन प्रणाली के अन्तर्गत पंचायत के माध्यम से न्याय सुलभ कराने की व्यवस्था विकसित हुई। कोई लिखित कानून न होते हुए भी न्याय के नैसर्गिक सिद्धान्तों का पालन करते हुए पीड़ित पक्ष को न्याय प्रदान करना पंचायतों की विशेषता रही है। आज राज्य एवं केन्द्र सरकारें समय – समय पर गरीबों व असहायों के हितों की रक्षा के लिये कानून बनाती हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शिविर का आयोजन करके आम आदमी को कानून की जानकारी मुहैया कराना एक बहुत सार्थक प्रयास है जिसके लिये इस शिविर के आयोजक बधाई के पात्र हैं|
( अतिरिक्त जानकारी के लिये कृपया पुनः पधारें । धन्यवाद ! )
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Saharanpur (19 Feb) It was as if a thermocol set had been erected for shooting of a movie. The streets, lanes, Kanshi Ram houses, hospital wards, police stations, helipads, the patients and their relatives - everything was created in a jiffy and was picture perfect. But the Directors and producers still had apprehensions as regards the mood of the lead artist Ms. Mayawati - the Chief Minister for whom the entire exercise had been done. What if she finds faults despite all this ? It could cost them their job too. Let's hope for the best and prepare for the worst.
Scene One : Thana Sadar. Road already cleaned twice since morning is being washed again. The statue of Hanuman Ji and all the sign boards, walls, name plates have been painted and polished again. The uniform of all the police officers and lower staff have been thoroughly cleaned and ironed again and again. The garbage usually spread over half of the Church Road has vanished overnight. Even the rumbling strips near the Thana have been flattened to avoid any jerks to the Madam. Several hooter fitted cars and jeeps are monitoring the entire area. All shopskeepers have been 'requested' to extend their cooperation by closing down their shops and showrooms. All police officers are wearing their best smiles today. The vehicular traffic on the road is conspicuously missing today except a few scooters and bikes and of course police vehicles.
Scene Two : Collectorate / Civil Court T point : All vehicular traffic wanting to go towards Hakikat Nagar, Police Line, Church Road, District Hospital has been stopped. People are waiting here with a hope to have a look at the heroin. Those who had some urgent work to do have gone back in search of some alternative route. Identical situation is there at Janakpuri Chowk, Hospital Chowk, Dehradun Chowk also.
Scene Three : Location Mirzapur village where a temporary helipad has been created by destroying the standing crop of a Dalit farmer and the field have been destroyed even without seeking his consent. DM, SSP and several officers on special duty are anxiously waiting for the lead artist to arrive.
Hearing the roar of chopper's powerful engine all eyes are towards the sky - squinting and trying to focus on a distant red / cream coloured chopper approaching fast. The director of movie shouts - lights, sound, action and the camera started rolling. The security staff stands in attention, the commandos are ready to tackle any eventuality. The chopper lands on the designated H mark amid uncontrollable storm of dust and dirt. When the dust settles down a bit, doors of the chopper open and the security officers, P.A. and the C.M. step down on a red carpet and get into the car waiting for her.
Scene Four : Primary School, Mirzapur : The CM is talking with the children of school who find it easy to answer her questions due to timely rehearsal of yesterday. She is very pleased with the answers given by the children and comes out of the classroom with an ear to ear smile on her face. The scene is okay and the Director is happy.
Scene Five : The CM, the officers and the local residents of the village are walking on the newly built RCC roads. Hmmm, quite a development has taken place. Good ! Well, the growth and development should continue, the CM advises the DM C.S. Verma. Okay, lets go to the next location. Yes, which police station has been decorated for today's inspection ? Thana Sadar? Let's go there.
Scene Six : Thana Sadar checked and found okay. Okay, now let's go to the District Hospital. Which wards are waiting for me? Surgical and the Emergency, of course !
Scene Seven : District Hospital. The emergency ward is shining like a 5 star category hotel room. There are only three or four patients and their relatives in the ward. (Rest of the Saharanpur is presumably free from all diseases! ). Even the patients and their relatives are smelling perfume. May be this hospital is employing aroma therapy to treat its patients! The CM asks a few questions whether they are getting proper care from the hospital staff and doctors. Yes, yes. The patients consider them very lucky for getting ill and having been admitted to such a nice hospital which can beat even the Apllo and Fortis in terms of medical care. Great, the CM is extremely pleased with herself for having provided such a nice administration to the state.
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Well, it is time to go back to home. She happily waves towards the Chief Medical Superintendent Dr. Sudhir Singh from behind the glass of her car and the car moves out of the hospital towards her helicopter waiting to take her back to Lucknow.
With this, the "Surprise check" of the District was completed. The screensaver created by the District Administration paid off handsomely. Crores of rupees spent within a week on certain roads, lanes, walls, boards, furniture stand repaid. No one is suspended and no one got his job threatened. Now, lets get back to our dirty, garbage laden, bumpy roads of Saharanpur once again.
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“महान दल पार्टी नहीं, क्रांति है जिसका गठन व्यवस्था परिवर्तन हेतु किया गया है। बसपा तो सपा की भी बाप निकली, प्रदेश में आज चारों ओर भय व भ्रष्टाचार व्याप्त है, कानून की खुले आम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जनता केअधिकारों का हनन हो रहा है।“ “महान दल” के प्रदेश अध्यक्ष राजेश मौर्य ने आगामी १७फरवरी को आयोजित की जा रही जनसभा के मद्देनज़र जनपद का तूफानी दौरा किया औरपत्रकारों से बात करते हुए आगे कहा कि कीचड़ को कीचड़ से नहीं, साफ पानी से ही धोया जा सकता है। मुख्यमंत्री मायावती पर सीधे कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि जब तकसत्ताधारी पार्टी का मुखिया ईमानदार और चरित्रवान नहीं होगा तब तक प्रदेश व देश काविकास नहीं होगा।
जिलाध्यक्ष रविन्द्र सैनी ने पत्रकारों को बताया किमहान दल की जनसभा को संबोधित करने के लिये मा. केशव देव मौर्य – राष्ट्रीय अध्यक्ष,सलीम इकबाल शेरवानी पूर्व केन्द्रीय मंत्री भारत सरकार, देवेन्द्र शाक्य प्रदेश अध्यक्ष आ रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि उनकी पार्टी आने वालेचुनावों में 75 प्रतिशत सीटों पर कांग्रेस के साथ मिल करचुनाव लड़ेगी।