• Tree Plantation by CrazyGreen members
  • The DM & CDO of Saharanpur
    The DM & CDO of Saharanpur
  • Look ! Why are you annoyed?
  • After 80 trees were planted, members of Crazy Green
  • Bharat Vikas Parishad Greater – seminar – “Sundar Kal ki Or”
  • श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर
  • सहारनपुर में तरणताल

आपकी वेबसाइट ’द सहारनपुर डॉट कॉम’ अपने नये कलेवर में आपके सम्मुख प्रस्तुत है।  पिछले कुछ समय से तकनीकी कारणों से हम आपसे निरंतर संवाद बनाये रखने में असमर्थता अनुभव कर रहे थे।  हमें उम्मीद है कि आप अपने सहारनपुर की इस अभिव्यक्ति से अपना स्नेह ठीक उसी प्रकार बनाये रखेंगे, जैसे कि पहले बनाये हुए थे।

हमारा प्रयास है कि इस साइट पर आपको वह सब कुछ मिले, जिसकी आप हमसे अपेक्षा करते हैं।   जैसे – सहारनपुर की नवीनतम गतिविधियों पर हमारी साप्ताहिक रिपोर्ट,  सहारनपुर की विभूतियों का परिचय,  विचारोत्तेजक लेख,  सरस कविताएं, हृदयस्पर्शी कहानियां, साक्षात्कार आदि ।   इसके अतिरिक्त सहारनपुर के पर्यटन स्थलों यथा – मंदिर,  मस्जिद,  गुरुद्वारे, चर्च, ऐतिहासिक महत्व के अन्य स्थलों के बारे में आधिकारिक जानकारी भी आप तक पहुंचाने का प्रयास है।

हमने जो प्रकल्प अपने हाथ में लिये हैं – ठोस कचरा प्रबन्धन,  टपरी से मेरठ तक डबल रेल लाइन,  पांवधोई  के पवित्र स्वरूप को वापिस लौटाना आदि – ये सब आपके सक्रिय सहयोग व समर्थन से ही सफल हो सकते हैं।  हमने अपनी गतिविधियों को गति देने के लिये सक्रिय सदस्यों की एक टीम का गठन किया है।  यदि आप भी हमारे कार्यक्रमों में सहयोग करना चाहते हैं तो कृपया संपर्क करें

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The Saharanpur Dot Com :पर किसलिये?

2500 वर्ष से भी अधिक पुराना गौरवपूर्ण इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में उल्लेखनीय व महत्वपूर्ण योगदान, शहीदे-आज़म भगत सिंह की कर्म स्थली; अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त काष्ठकला उद्योग; शाकुंभरी देवी, भूतेश्वर, बागेश्वर, त्रिपुर बाला सुन्दरी देवी जैसे आध्यात्मिक तीर्थ स्थल; पं. कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर जैसे साहित्यकार; पंजाब, हरियाणा, उत्तरांचल और हिमाचल प्रदेश जैसे चार-चार प्रदेशों से निकटता; रिमाउंट ट्रेनिंग स्कूल और एयरफोर्स सरसावा जैसे सैन्य संस्थान; आई.टी.सी. और स्टार पेपर मिल जैसे विशाल उद्योगों समेत सात सौ से भी अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां; उत्तर भारत की प्रमुख व्यापारिक मंडी; मुंबई-अमृतसर व हावड़ा-अमृतसर जैसे देश के दो प्रमुख रेलमार्गों की नगर में मौजूदगी; आई.आई.टी. रुड़की, दारुल-उलूम देवबंद व मदरसा मज़ाहिर उलूम जैसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान, शहर के युवाओं में सृजनात्मकता को गति प्रदान कर रही दर्जनों साहित्यिक, सामाजिक, सांस्कृतिक संस्थायें; कमिश्नरी का दर्ज़ा।

किसी भी शहर को प्रसिद्धि और सम्मान पाने के लिये, इससे भी अधिक कुछ चाहिये होता है क्या?  पर इतनी विशिष्टतायें होते हुए भी सहारनपुर को देश में, प्रदेश में वह सम्मान हासिल नहीं है जिसका वह अधिकारी है। सहारनपुर को एक आध्यात्मिक नगरी, शिक्षा के प्रमुख केन्द्र और दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता था पर ऐसा नहीं किया गया। इसके सर्वथा विपरीत, सहारनपुर आज भी अनेकानेक समस्याओं से घिरा हुआ है जिनमें सर्वप्रमुख हैं – नागरिक सुविधाओं की कमी, जिधर भी नज़र दौड़ाओ – उधर गंदगी का साम्राज्य, टूटी-फूटी सड़कें, चरमराती हुई अस्त-व्यस्त यातायात व्यवस्था, बदहाल विद्युत व जल आपूर्ति, गंदे नाले के रूप में परिवर्तित हो चुकी नदियां और इन सब से बढ़कर — सामान्य जन में नागरिकता के श्रेष्ठ गुणों का अभाव !  एक अजब सी तंद्रा में सोये पड़े हैं सहारनपुर के लोग !  उन की स्थिति कुछ कुछ हनुमान जी जैसी ही है जो एक श्राप के वशीभूत अपनी ही शक्तियों को भुलाये बैठे रहे ।  उनको इस तंद्रा से जगाया जाम्बवान ने ।  और एक बार हनुमान इस तंद्रा से जाग गये तो स्वयं में निहित शक्तियों के बल पर इतना कुछ कर डाला कि आज तक पूज्य हैं, वन्दनीय हैं।

सहारनपुर को उसका वह सम्मान मिले, जिस पर उसका हक बनता है, इसके लिये आवश्यक है कि सहारनपुर वासियों की भी तंद्रा टूटे,  अपने प्रति और अपने नगर के प्रति दिखाई देने वाली नकारात्मक भावना समाप्त हो।  जब तक अपने शहर को ’सड़ान्धपुर’ मानने की प्रवृत्ति नहीं बदलेगी, शहर के प्रति हमारा दुर्व्यवहार भी समाप्त नहीं होगा। अभी सहारनपुर वासी अपने शहर का सम्मान नहीं करते, इसीलिये अपने प्रति भी जो एक सहज आत्म-सम्मान की भावना उनमें दिखाई देनी चाहिये थी, वह भी कूड़े के ढेर में ही कहीं दबी हुई पड़ी है। उनको यह अहसास भूल गया है कि यदि दुनिया की निगाहों में सहारनपुर का सम्मान बढ़ेगा तो सहारनपुर वासियों का सम्मान स्वयमेव ही बढ़ेगा।

द सहारनपुर डॉट कॉम पोर्टल वेबसाइट सहारनपुर वासियों की इसी सोच को बदलने का एक अभिनव प्रयास है। सहारनपुर की एक उज्ज्वल छवि विश्व पटल पर स्थापित हो; इस शहर की अच्छाइयों और यहां की श्रेष्ठताओं को देखकर और उनके बारे में जानकर, पढ़कर उनमें अपनेइस शहर के लिये सोया पड़ा प्यार और सम्मान पुनः जाग्रत हो; वे सब आपस में एक दूसरे को भी — सहारनपुर वासी होने के नाते स्नेह व सम्मान से देखें; अपने नगर की बेहतरी के लिये कुछ करने की भावना उनके जागे; उनकी सृजनात्मक, सकारात्मक सोच को नये आयाम मिलें, दिशानिर्देश मिले, प्रोत्साहन मिले – यही सोच है द सहारनपुर डॉट कॉम के निर्माण के पीछे । जिस उत्साह से देश विदेश में बैठेसहारनपुर के युवावर्ग ने इस प्रयास का स्वागत किया है और जितनी तेजी से लोग इस पोर्टल पर आकर जुटने लगे हैं उससे आशा बंधने लगी है कि यह प्रयास निरर्थक नहीं रहेगा। सहारनपुर वासियों की सोई पड़ी सकारात्मकता को जिस मंच की तलाश थी, वह उनको मिल गया लगता है। अपने सहारनपुर के प्रति उनके हृदय में सोया हुआ प्यार न केवल जागने लगा है, वरन्‌ उमड़-घुमड़ कर स्वयं को प्रकट भी कर रहा है। द सहारनपुर डॉट कॉम पोर्टल ने सहारनपुर वासियों को इतना उत्साहित कर दिया है कि वे खुद अपनी ओर से सहायता की पेशकश कर रहे हैं, यथासंभव योगदान करने की इच्छा प्रकट कर रहे हैं।

अब आवश्यकता है तो बस इतनी कि इस आन्दोलन को और गति एवं शक्ति मिले। जो उत्साह की भावना आज कुछ हज़ार व्यक्तियों में दिखाई दे रही है, वह सहारनपुर के जन-जन में विस्तारित होती चली जाये। यदि सहारनपुर वासियों के मन में अपने शहर और जनपद के प्रति उत्साह, प्यार व सम्मान की भावना बलवती होगी तो यहां पसरी गंदगी को देखकर मन में क्षोभ भी उत्पन्न होगा और सहारनपुर की सभी समस्याओं का प्रभावी हल निकालने की आवश्यकता भी अनुभव होगी। अभी तो उत्साह विहीनता का यह आलम है कि गंदगी को भी जन-जन में स्वीकार्यता मिल गई है, अधिकांश लोगों ने इसे सहारनपुर की नियति मान लिया है। ’सड़ान्धपुर’ शब्द की उत्पत्ति इसी जन-स्वीकार्यता और इसी सुषुप्तावस्था से हुई है। पर जब जन-जागरण का बिगुल बजना आरंभ होगा तो हमारे शहर के नीति-नियन्ताओं की कुंभकर्णी निद्रा भी टूटेगी । जनता जाग जायेगी तो वे सब कैसे सोते रह सकेंगे?

कुल मिला कर यह कहा जा सकता है कि द सहारनपुर डॉट कॉम एक ऐसा प्रयास है जिसे आगे बढ़ाने का उत्तरदायित्व सहारनपुर के युवा वर्ग ने अपने सुदृढ़ कंधों पर ले लिया है। सहारनपुर के साहित्यकार, लेखक, कवि, विचारक, पत्रकार, समाजसेवी और आध्यात्मिक नेता भी इन युवाओं को मार्गदर्शन देने के लिये एकजुट हो रहे हैं। जिस कार्य को गुरुजनों का आशीर्वाद मिले, युवाओं की टीम जिसे आगे बढ़ाने के लिये तत्पर हो, उस कार्य की सफलता तो भगवान भी सुनिश्चित कर देते हैं। यही प्रभु से कामना भी है।

- सुशान्त सिंहल
संस्थापक निदेशक एवं संपादक
द सहारनपुर डॉट कॉम

13 Comments on Home

  1. B M Dhiman // July 29, 2014 at 8:30 am // Reply

    Dear Sushant,

    I am very thankful to you that you are running such a good theme of our city.
    I am far away from Country but I open this site not regularly but 2 times a week. I am in Luanda a capital of Angola west african country since 2007 and frequently visiting India.
    I am coming after 2 weeks and this time sure I will meet you personally.
    Please provide your contact number to get easy access to you.

    Regards,
    Brij Mohan

  2. RANJAN MUKHERJEE // August 1, 2014 at 6:38 am // Reply

    I am very thankful to you that you are running such a good theme of our city.

    I am at present in Kolkata ( West Bengal) but I open this site not regularly but in future I will definitely open this site. I left Saharanpur in the Year 1999 due to my daughter’s health condition . She is a Thalassaemia Patient and needs regular blood transfusion. In Saharanpur there is no blood bank and scarcity of blood.

    My Request you to kindly promote Prevention of Thalassaemia through this web side. If you need any help in this regard, I am always ready for to help you.

    Please provide your contact number to get easy access to you.

    Regards,
    Ranjan Mukherjee

    • Dear Ranjan Mukherjee,

      While we are delighted to hear from you, we are equally pained to learn of your daughter’s illness and pray to Almighty to bestow upon her complete health and long life. We shall certainly take up the subject of prevention of Thalassaemia at our level. Let’s hope something positive comes out of it for the benefit of the mankind. I can be contact at – thesaharanpur@gmail.com. Although my mobile no. 9045981541, I prefer to communicate through email due to some hearing related issues.

      Best regards,
      Sushant Singhal
      Chief Editor

  3. RANJAN MUKHERJEE // August 2, 2014 at 8:46 am // Reply

    Dear Sushant Singhal,

    Thanks for your reply . This is to inform you that my sister now she is leaving in Harayana has research work on SAHARANPUR and written / edited a book on Saharanpur . If you need the same please write me or call me in my cell no. 9831063720. I can provide you all in details.

    Regards,

    Ranjan Mukherjee

  4. Dear Ranjan Mukherjee,

    That would be great. If she would permit us to quote from her book on this site, we shall certainly like to use and promote her work.

    Sushant Singhal

  5. before sum days, our city in a very big trouble .. aftr dat trouble d picture of our city was totally changed.. I had nevr seen such type of picture of saharanpur in my dreams .. N i really thanks to d ownr of dis site dat he establish dis site for d bettrmnt of saharanpur .. N i salute 4 ur one mre idea dat u supply sum papers 4 writing stories, poems 4 gttng mre info abt d saharanpur .. Really sir hats off to you .. N m a studnt of k.l.g. Public school , ambala road .. May you idea wrks n our city ravish on everyone’s lips :*

    • Dear Diksha Saxena,

      Thank you for visiting this portal and expressing your views. Young people like you are the hope for this city and the nation. Raise your voice against all bad things alongwith your friends and teachers and things will change for the better. You are also invited to write on this web portal on regular basis.

  6. Dear Sushant Singhal ji I highly appreciate your effort for our city. I was waiting from a long time that such effort should be started for our city so that our citizen and other people can connect to saharanpur directly.
    Thank You
    Nafees Ahmad
    Contact: +919719197997

    • Dear Mr. Nafees Ahmad,

      Thank you very much for your kind words. Although it was a difficult start a few years earlier, but a good team of highly devoted friends makes every project easy. You are welcome to be a part of our projects.

      Regards,
      Sushant Singhal

  7. कश्मीर सिंह // August 10, 2014 at 3:13 am // Reply

    Very Nice response from the schools..
    Go Ahead and prove you are the best administrator of this Portal.

  8. Sushant ji , Happy 68th Independence day . really your devotion ,dedication and attachment with Saharanpur is remarkable .salute to your noble cause and task.
    With warm regards ,
    Madan Pal
    Asstt.Commandant

    • Dear Madan Pal Ji,

      You are always a source of encouragement for us. Thank you for your affectionate words. Happy Independence Day and Happy Janmashtami to all of you.

      Sushant Singhal

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